मुंबई के मुलुंद इलाके में एक नर्सिंग होम में गुरुवार को आग लगने से एक डॉक्टर की मौत हो गई। हालांकि, खुशकिस्मती यह रही कि इस दौरान 14 मरीज बचा लिए गए।
आग लगने की वजह से गोकुल नर्सिंग होम के पहली मंजिल समेत दो इमारतों को जोड़ने वाली गैलरी और कमरे में पूरी तरह से धुआं भर गया था।
संयोगवश आग वार्ड और आईसीयू में नहीं फैली। इसकी वजह से मरीज और स्टाफ को बचने का पर्याप्त मौका मिल गया, वरना नुकसान ज्यादा हो सकता था।
आग सुबह 3.05 बजे लगी। अस्पताल के ओपीडी के पास स्थित कमरे में डॉ राहुल रूद्रवर (27 वर्ष) सो रहे थे। धुएं में दम घुटने से उनकी मौत हो गई। संभवतः डॉक्टर जिस कमरे में थे उसका दरवाजा बंद था।
2011 में कोलकाता स्थित एमआरआई हॉस्पीटल में लगी आग में 91 मरीजों और तीमारदारों की जान चली गई थी।
गोकुल नर्सिंग होम के संचालक डॉक्टर नरेश मेहता ने कहा, "मैं घटनास्थल पर हादसे के एक मिनट के अंतराल पर ही पहुंच गया था। मैंने देखा कि सभी रोगी पूरी तरह से सुरक्षित हैं। लेकिन मैं डॉक्टर राहुल को नहीं बचा सका।"
दो घंटे की मशक्कत के बाद अग्निशमन कर्मी ने कहा, "हादसे की वजह का पता लगाया जा रहा है। आग शॉर्ट-सर्किट से लगी या अन्य वजह से, इसके बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।"