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इन 12 चीजों ने बदली जमाने की राह

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2013 की हवाओं में युवाओं का जोश कुलांचे मारता रहा। फिल्म के अलावा भी मनोरंजन के विकल्पों पर लोगों ने भरोसा किया। स्वाद का सफर घर की किचन से बाहर आ गया और जैसी सोच, वैसी गाड़ी घरों की शान हो गई। सबसे बड़ा बदलाव दिखा, युवाओं में बढ़ती जागरुकता।
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बीते कई सालों के मुकाबले इस साल युवा समाज और देश से जुड़े मुद्दों में ज्यादा सक्रिय नजर आए। आने वाले सालों के लिए ये साल कई मामलों में एक नई जमीन और दिशा तैयार करके जा रहा है। कुछ लफ्जों में बयां करना हो तो जमील मज़हरी साहब का एक शेर है-'कभी राह मैंने बदली तो जमीं का रक्स बदल गया...कभी सांस ली ठहर कर तो ठहर गया जमाना।'

धार्मिक सीरियलों का दौर

इस साल छोटे परदे पर ऐसा लगा मानो 25 साल पुराना दौर एक बार फिर से लौट आया। समाजशास्‍त्री इस बदलाव को पब में वक्त गुजारने वाली नई पीढ़ी के लिए जरूरी मान रहे हैं।

कहा जाने लगा कि धार्मिक सीरियलों से ही सही, युवा पीढ़ी में विभिन्न धर्मों के विचारों और उनकी अच्छाइयों की समझ बढ़ेगी और रोजमर्रा की जिंदगी में भी उस पर अमल की गुंजाइश होगी। 

यही नहीं, पीढ़ियों के बीच मित्रता का दायरा बढ़ेगा और एक स्वस्‍थ समाज की रचना होगी। लेकिन इसी दौर में पौराणिक घटनाओं को सुविधा अनुसार ट्वीस्ट करने की बात भी सामने आई।

इस साल टीवी पर रामायण, महाभारत, महादेव, जोधा-अकबर और महाराणा प्रताप जैसे कई धारावाहिक चर्चा में बने रहे।

कश्मीर में कमाल

यह किसी सांस्कृतिक अजूबे से कम नहीं है। चीनार के साये में मॉल्स की दस्तक ने स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पर्यटकों को भी सुखद आश्चर्य में डाल दिया है। कश्मीर में सरकार मॉल खोल रही है और निजी कंपनियां भी।

यहां बने सरकारी स्वामित्व वाले पहले मॉल ‘सांगरमल शॉपिंग काम्पलेक्स’ में इस नई संस्कृति की झलक दिखती है। इसकी ईंटें श्रीनगर की ऐतिहासिक लाल मस्जिद जैसी हैं।

पंथ्‍ा चौक से परीमपोरा तक 17 किमी. लंबी सड़क और लाल चौक से हुमहुमा तक 8 किमी. लंबी सड़क के किनारे कई शॉपिंग मॉल और कमर्शियल कांप्लेक्स खड़े हो रहे हैं। यह बदलते कश्मीर की तस्वीर है, जो एक नई उम्मीद जगाती है।

साइबर जबान

इसे इंटरनेट पर यंग जेनरेशन की नई भाषा कह सकते हैं। इस साल एक आम बात यह देखने में आई कि अपनी निजी जिंदगी को माता-पिता से छिपाने के लिए ज्यादातर किशोर साइबर कम्युनिकेशन के रूप में इन कोड वर्ड्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।

शोध के मुताबिक उनके यहां RIDNECK शर्मसार है, GETTING MWI नशे में है, OWNAGEEEE-रिलेशनशिप है, LEGAL-सेक्स करने की इजाजत है, DORBS-एडोरेबल (बहुत ही प्यारे हो), GYPO-गैट योर पैंट्स ऑफ, IWSN-आइ वांट सेक्स नाउ, GNOC-गैट नैकेड ऑन कैमरा और PIR-पेरेंट्स इन रूम है। ऐसे ढेरों शब्द युवाओं की जिंदगी का हिस्सा बन रहे हैं।

आओ प्यार करें

प्रेम में सफलता अच्छी बात है, लेकिन असफलता डूब मरने जैसी चीज। आज के दौर में जहां हर चीज को सिखा देने का चलन बढ़ गया है, उसमें एक नया कोर्स  ‘इश्क’ भी शरीक हो गया है।

लव-गुरु की तलाश, डेटिंग का क्रैश कोर्स, बैकअप हेल्पलाइन डॉटकॉम का चक्कर लगाने वालों या प्रेम के फिनिशिंग स्कूल के वर्कशॉप में हिस्सा लेने वालों की तादात बढ़ती जा रही है।

ऐसे में अपनी जिंदगी में आधी सदी देख चुके लोगों को मुहल्ले और कस्बों के वो उस्ताद याद आ रहे हैं, जो काफी खुशामद के बाद प्रेमपत्र लिख दिया करते थे।

वो लाल रंग...छोड़ गया

इस साल शादी के मंडप पर किसी को शायद किशोर का ये गाना याद नहीं आया होगा-’ये लाल रंग कब मुझे छोड़ेगा।’ वक्त बदला तो इस साल शादी के जोड़े का रंग भी बदलता हुआ दिखा। हरे रंग में, पीले रंग में, गुलाबी रंग में और कहीं कहीं तो सुनहरे के साथ सफेद रंग में भी दुल्हनें दिखीं। दूल्हे भी अलग रूप-रंग में नजर आए। मंडप पर सास-बहू वाले सीरियल्स का असर भी देखने को मिला।

कभी शादी में दुल्हन के लिए लाल रंग की पोशाक शुभ माना जाती थी, लेकिन अब लगता है यह बीते जमाने की बात हो जाएगी। इंडो-वेस्टर्न लुक वाले दूल्हा-दुल्हन के जोड़े को अब लाल रंग के बारे में सोचने की फुरसत कहां? तो जैसी सोच, वैसा शोरूम। बड़े-बड़े डिजाइनर लाल रंग से अलग खड़े नजर आए। आने वाले साल में भी शायद यही ट्रेंड्स देखने को मिलें।

हाईटेक चुनाव का असर

नेटवर्क कंपनी आइडिया को अब अपने पर गर्व करने का वक्त आ गया है। उसके एक विज्ञापन में एक पार्टी लोगों से पूछती है कि दिल्ली में सरकार बनाए या नहीं। इस आइडिया ने सचमुच पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था को एक नया रास्ता दिखा दिया।

दिल्ली में आप पार्टी ने सोशल नेटवर्किंग के जरिये लोगों से पूछा कि सरकार बनाए या नहीं। अरविंद केजरीवाल ने शायद इसकी ताकत को पहचाना और ′आप′ को हाईटेक बनाकर चुनाव में उतरे।

जनमत निर्धारण के सशक्त माध्यम के रूप में सोशल मीडिया ने अपनी जगह बनाई है। विचारों की अभिव्यक्ति के लिए सभा-सम्मेलनों की बजाय फेसबुक विचारों के आदान-प्रदान का प्रमुख जरिया बन गया।

एक रिसर्च में सामने आया कि केवल पांच फीसदी लोगों के लिए वेबसाइट और 25 फीसदी लोगों के लिए टीवी खबरों का प्राथमिक स्रोत है।

किराए की कोख का कारखाना

शायद आपको जानकर यकीन न हो, लेकिन भारत में किराए की कोख यानी सरोगेसी का बाजार लगभग 63 अरब रुपये से ज्यादा का है। जानकारों के मुताबिक भारत सरोगेसी का हब बन गया है।

इसके पीछे अच्छी तकनीक, कम लागत और अनुकूल कानून कुछ खास कारण हैं। अभी तक किराए की कोख का ये चलन विदेशियों के संदर्भ में ही ज्यादा नजर आता था।

मगर इस साल देखने में आया कि भारत में भी लोग बच्चे की चाहत के लिए सरोगेसी के विकल्प को अपनाते नजर आए। गुजरात के छोटे से शहर आणंद में बना डॉ. नयन पटेल का सरोगेसी हाउस इस बात का उदाहरण पेश करता है, जहां सरोगेट माताओं की कोख से 500 से ज्यादा बच्चे जन्म ले चुके हैं।

दिन-रात बढ़ रहे इस चलन या कहें कि कारोबार ने महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। ऐसी गरीब महिलाओं की संख्या बढ़ती जा रही है, जो अपनी सेहत को दांव पर लगाकर दूसरों के घर खुशियों के चिराग जला रही हैं।

ऐसे में इस पर यह बहस भी जारी है कि क्या यह गरीबी का बेजा फायदा उठाना तो नहीं है!

किचन का क्या काम!

मियां-बीवी अगर कामकाजी हों, तो भला किचन में कौन माथा मारना चाहेगा। ऐसे में रेस्टोरेंट्स में खाना खाने का चलन खूब दिखा।

कॉल करके खाना मंगाने की परम्परा तो काफी लंबे समय से चली आ रही थी, लेकिन इस साल ऑनलाइन खाना ऑर्डर करने की परम्परा भी शुरू हो गयी। मुंबई में पिनाक शाह और बृजेश छेदा ने यह परम्परा शुरू की।

उन्हीं की तरह कई अन्य भारतीय उद्यमी भी साइबर दुनिया के जरिए मेज पर खाना परोस रहे हैं। इसमें एक बदलाव और हुआ कि यह खाना बिल्कुल घर जैसा है।

खाने के लिए घर से बाहर जाने की परंपरा अभी थमी नहीं थी कि अब घर की मेज पर आने लगा है भोजन। तो क्या अब घर का किचन बेकार ही रहेगा। जानकर कहते हैं, यह स्वाद की तलाश है और कुछ नहीं।

पॉकेट में पोर्न

2013 में मोबाइल के कई अवतार सामने आए और इन अवतारों के साथ ही पोर्नोग्राफी भी हर व्यक्ति की पॉकेट में पहुंच गयी। स्मार्टफोन से बनायी गयी रेप की क्लिपों को रिकॉर्ड किया गया और यह क्लिप लोगों की चाहत बन गयी।

गूगल के मुताबिक रेप को एक साल में 40.10 लाख बार सर्च किया गया। यह सिर्फ गूगल सर्च का हिसाब है। इसमें वे लोग शामिल नहीं हैं, जो मोबाइल रिपेयर की दुकान या साइबर कैफे में जाकर पोर्न क्लिप की मांग करते हैं।

गूगल के एक सर्वे में सामने आया कि 90 लाख से भी अधिक भारतीय अपने फोन से पोर्न कंटेंट डाउनलोड करते हैं फरवरी 2013 में मैसूर स्थित ‘मॉरल कॉंशियसनेस’ ग्रुप ने कॉलेज में पढ़ने वाले 964 छात्रों का करीब सालभर तक सर्वे करने के बाद पाया कि 75 प्रतिशत अंडरग्रेजुएट छात्रों या प्री-यूनिवर्सिटी के छात्रों ने नियमित रूप से पोर्न सामग्री को देखा है।

प्रेरणा बने पॉडकास्ट

युवाओं में मोटिवेशन के लिए पॉडकास्ट एकदम फेमस हो गया। पहले ऑडियो ब्लॉगिंग के रूप में इसे जाना जाता रहा, लेकिन जल्द ही इसने अच्छा खासा सफर तय किया।

पॉडकास्ट इंटरनेट के जरिए प्रसारित ऑडियो या वीडियो फाइल है, जिसके लिए इंटरनेट पर रजिस्टर (सब्सक्राइब) किया जा सकता है। पॉडकास्ट कवि सम्मेलन, पॉडकास्ट पर बड़े-बड़े लेख, पॉडकास्ट पर गीत।

यानी सुनने-गुनने का दिलचस्प माध्यम। अब पॉडकास्ट के दीवानों की संख्या अपने देश में इतनी है कि इसे लोग इंटरनेट पर एक रचनात्मक क्रांति के रूप में देख रहे हैं।

पेपराजी से बचकर

यह साल पेपराजी का रहा। अगर आप पेपराजी के बारे में नहीं जानते हैं तो आपको बता दें कि पेपराजी वो फोटोग्रॉफर्स होते हैं, जो चोरी-छिपे चर्चित हस्तियों की तस्वीरें लेने को उतावले रहते हैं।

बॉलीवुड के हैंडसम हंक रणबीर कपूर और हॉट बाला कैटरीना कैफ ने कोशिश तो बहुत की, लेकिन पेपराजी उन्हें छोडने के बिल्कुल भी मूड में नहीं थे। पिछले दिनों रणबीर कपूर और कैटरीना कैफ की स्पेन में छुटि्टयां मनाते हुई एक तस्वीर ने सोशल मीडिया में कोहराम मचा रखा था।

अब बारी सलमान खान की है। सलमान पिछले दिनों अपनी गर्लफ्रेंड लूलिया वेंचूर के साथ पिकनिक मनाते दिखे। यही नहीं, इस साल कई सितारों के बच्चे भी कैमरे के सामने अपना चेहरा छिपाते दिखे।

सनी देओल के 21 वर्षीय बेटे करन देओल काफी मशक्कत के बाद पेपराजी से बच पाए। तस्वीर तो सामने आई, लेकिन चेहरा छुपा हुआ था। कुछ दिन पहले शाहरुख के बेटे भी इसके शिकार बने। पश्चिम में तो सितारे परेशान थे ही, इस वर्ष हिंदुस्तान में भी पेपराजी सुर्खियों में रहे।
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चल निकली गंदी बात

गंदी बात कह दें तो बात दूर तलक जाती है। पिछले कुछ समय से बॉलीवुड में इस फॉर्मूले को कभी संवादो तो कभी गानों के जरिए भुनाने की कोशिश की जाती रही। शीला की जवानी से लेकर हनी सिंह के तमाम गीतों तक में कई बार गंदी बात नजर आई।

इस पर बवाल भी होता रहा औऐर गाने हिट भी रहे। लेकिन मनोरंजन उद्योग में इसे बिजनेस का मूल मंत्र मानने वाले भी उस समय चौक गए जब साल के आखिर में आई फिल्म 'आर राजकुमार' का गाना आया- एबीसीडी बढ़ ली बहुत, अच्छी बात कर ली बहुत, अब करूंगा तेरे साथ गंदी बात......।

शाहिद कपूर और दबंग गर्ल सोनाक्षी स‌िन्हा के इस डांस ट्रैक ने इंटरनेट पर रिलीज होने के तीन दिन के भीतर ही दस लाख से ज्यादा हिट्स जुटा लिए।

फिल्म से ज्यादा गाना हिट रहा और उससे भी ज्यादा गंदी बात वाला आयडिया। दर्शकों ने भी तमाम बातों और आलोचनाओं के बावजूद इसे खूब पसंद किया। अब इसे खुलापन कहे या कुछ और..।  
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