गुजरात में पटेल समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर चले आंदोलन ने भले की केंद्र की चिंता बढ़ा दी है, मगर जातिगत जनगणना जारी करने को लेकर बन रहे दबाव को इसने जरूर हल्का कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार सरकार अब किसी दबाव में आए बिना जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट अपनी सहूलियत के अनुसार जारी करेगी। सियासी हलकों में आशंका जताई जा रही है कि जातिगत आंकड़े जारी होने पर आरक्षण समर्थकों और विरोधियों के बीच राजनीतिक जंग तेज हो सकती है।
गुजरात में हार्दिक पटेल ने अपने आंदोलन के जरिए जातिगत आंकड़ों के आने के बाद के हालातों का ट्रेलर दिखा दिया है। हालांकि कुछ सियासी दल जातिगत रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग अब भी कर रहे हैं। नेहरू मेमोरियल सेंटर, नई दिल्ली के नेशनल फैलो हिमांशु राय का कहना है कि संघ एवं भाजपा की सोच कभी भी आरक्षण के पक्ष में नहीं रही। मजबूरी में इन्हें समय-समय पर आरक्षण का समर्थन करना पड़ा है।