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पटेल आंदोलन से मोदी सरकार को हुआ फायदा, जानिए क्या?

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गुजरात में पटेल समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर चले आंदोलन ने भले की केंद्र की चिंता बढ़ा दी है, मगर जातिगत जनगणना जारी करने को लेकर बन रहे दबाव को इसने जरूर हल्का कर दिया है।
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सूत्रों के अनुसार सरकार अब किसी दबाव में आए बिना जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट अपनी सहूलियत के अनुसार जारी करेगी। सियासी हलकों में आशंका जताई जा रही है कि जातिगत आंकड़े जारी होने पर आरक्षण समर्थकों और विरोधियों के बीच राजनीतिक जंग तेज हो सकती है।

गुजरात में हार्दिक पटेल ने अपने आंदोलन के जरिए जातिगत आंकड़ों के आने के बाद के हालातों का ट्रेलर दिखा दिया है। हालांकि कुछ सियासी दल जातिगत रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग अब भी कर रहे हैं। नेहरू मेमोरियल सेंटर, नई दिल्ली के नेशनल फैलो हिमांशु राय का कहना है कि संघ एवं भाजपा की सोच कभी भी आरक्षण के पक्ष में नहीं रही। मजबूरी में इन्हें समय-समय पर आरक्षण का समर्थन करना पड़ा है।
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गुजरात में पटेल समुदाय संपन्न जातियों में शामिल

उनका कहना है कि आरक्षण राजनेताओं की सियासत चमकाने का औजार बन गया है। राय का कहना है कि गुजरात में पटेल समुदाय संपन्न जातियों में शामिल है। उनकी संख्या सियासत पर प्रभाव डालने लायक है।

ऐसे में उन्हें आरक्षण मिल जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। फिलहाल संघ-भाजपा की सोच से लगता नहीं है कि उन्हें आरक्षण मिलेगा। वहीं जातिगत जनगणना के बाद के हालातों पर राय का मानना है कि आंकडे़ आए बिना संभावना जताना ठीक नहीं है।

हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया है कि देश के एक बड़े वर्ग में आरक्षण के खिलाफ भी आग जल रही है। वैसे गुजरात में हार्दिक के आंदोलन को इसी दबी हुई आग का हिस्सा माना जा रहा है।

केंद्र सरकार के रणनीतिकार भी आरक्षण की इस आग को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। जबकि बिहार में चुनाव को देखते हुए जनता परिवार जातिगत आंकड़े जारी करने के लिए न केवल दबाव बना रहा है बल्कि मोदी सरकार पर सवाल भी खड़े कर रहा है।
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