गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा की ओर से पीएम पद का उम्मीदवार बनाने की मुहिम में जुटे नेताओं को पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने वाणी पर संयम रखने की नसीहत दी है। उन्होंने एनडीए के सहयोगी दलों में इस मसले को लेकर तेज होती बयानबाजी को देखते हुए पार्टी नेताओं से कहा कि इस तरह के मुद्दे पार्टी फोरम में ही उठाए जाने चाहिए।
इस बीच बुधवार को राजनाथ अपनी टीम के गठन को लेकर लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज से मिले। पार्टी अध्यक्ष चुने जाने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात थी। राजनाथ फरवरी के अंत तक अपनी टीम का ऐलान करने की कोशिश में हैं।
इधर, पार्टी नेताओं को राजनाथ की इस नसीहत को पीएम उम्मीदवारी प्रकरण पर विराम देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन एनडीए में भाजपा के सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने इस मामले को फिर से जिंदा कर दिया है।
अकाली दल के नेता और पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने कहा कि भाजपा जिसे भी पीएम उम्मीदवार घोषित करेगी, अकाली दल को वह मान्य होगा। भाजपा के पीएम उम्मीदवार भले ही मोदी ही क्यों न हों अकाली दल उनका समर्थन करेगा।
इससे पहले राजनाथ ने पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं से संयम बरतने व जनता का विश्वास जीतने के लिए जनसंघर्ष करने कहा। उन्होंने कहा कि पार्टी को मजबूत बनाने के लिए सभी को एकजुट होकर काम करना होगा। पार्टीजनों को सलाह देते हुए कहा कि नेतागण अच्छी वाणी बोलें, उनमें संयम होना चाहिए।
दरअसल, मोदी को पीएम का उम्मीदवार बनाने की मांग पर यशवंत सिन्हा, राम जेठमलानी व सीपी ठाकुर के मैदान में उतरने के बाद यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था। इससे भाजपा व जदयू के बीच तीखी बयानबाजी होने की आशंका बनती जा रही थी। इसलिए राजनाथ ने इन बड़बोले नेताओं पर लगाम देने के लिए नसीहत दे दी। पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद वे दूसरी बार पार्टी मुख्यालय आए थे। वे लगभग दो घंटे तक रहे।