दिल्ली में 3 से 5 नवंबर तक संत निरंकारी मिशन का समागम है। वहीं, प्रदेश में निरंकारी मिशन के अनुयायियों की संख्या एक लाख से ज्यादा है। इस समागम में हिस्सा लेने के लिए हिमाचल से 30 से 40 हजार अनुयायियों के जाने की उम्मीद है। 4 नवंबर को प्रदेश में चुनाव हैं। इसके बावजूद करीब 40 हजार वोटर मतदान के दिन हिमाचल से बाहर रहेंगे। इससे सभी के हाथ-पांव फूले हैं।
मंडी, शिमला, ऊना, कांगड़ा और हमीरपुर जिले में इनके अनुयायियों की संख्या दूसरे जिलों के मुकाबले ज्यादा है। चुनावी समर में उतरे प्रत्याशी वोटरों से समागम में हिस्सा न लेने की अपील भी नहीं कर पा रहे हैं। महज मतदान केंद्र तक आने का निवेदन कर ही वापस लौट रहे हैं। इस समागम की तिथियां अगस्त में तय हो गई थीं। अधिकतर अनुयायियों ने समागम में हिस्सा लेने का कार्यक्रम भी तय कर लिया था, लेकिन बीच में चुनाव के ऐलान से चुनाव डयूटी पर लगे सरकारी कर्मचारियों को समागम में जाने का कार्यक्रम ड्राप करना पड़ा है।
हिमाचल में निरंकारी मिशन के मीडिया का काम देख रहे राम किशन ने माना कि समागम में हिस्सा लेने के अनुयायी जाएंगे। 3 से 5 तक ही समागम चरम पर होगा। उन्होंने माना कि चुनाव डयूटी के कारण कई कर्मचारी समागम में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
चुनाव आयोग की मुहिम को भी झटका
हर मतदाता को बूथ तक पहुंचाने की चुनाव आयोग की मुहिम को भी इससे झटका लगेगा। समागम के चलते सीधे 30 से 40 हजार वोटर मतदान केंद्र नहीं पहुंच सकेंगे। हालांकि आयोग फिलहाल सभी से वोटिंग के लिए बूथ पर पहुंचने की अपील कर रहा है।
निवेदन के अलावा कोई चारा नहीं
समागम में हिस्सा लेने जाने वाले अनुयायियों को मतदान केंद्र तक लाने के लिए राजनीतिक दलों के पास भी कोई चारा नहीं है। भाजपा प्रवक्ता गणेश दत्त ने बताया कि सभी को वोटिंग के लिए बूथ तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए पार्टी की ओर से सभी से निवेदन किया जाएगा। वहीं कांग्रेस महासचिव कुलदीप राठौर ने कहा कि वोटरों से मतदान केंद्र तक पहुंचने का आग्रह किया जाएगा। हिलोपा के कार्यालय सचिव टिक्कू ठाकुर ने कहा कि वे सभी वोटरों से हिमाचल में बदलाव के लिए वोट देने को कहेंगे।