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चुनावी वादों पर रोक के हक में नहीं हैं पार्टियां

Tue, 13 Aug 2013 12:02 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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सरकारी खजाने को लुटाते हुए लुभावने चुनावी वादों से वोटरों को लुभाने पर अंकुश लगाने के सुप्रीम कोर्ट के रुख से तमाम राजनीतिक दल सहमत नहीं हैं। देश के अधिकांश राजनीतिक दलों ने चुनावी घोषणापत्र के लिए गाइड लाइन बनाने पर असहमति जताई है।
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उच्चतम न्यायालय के आदेश पर गाइड लाइन बनाने के लिए चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों से सुझाव के लिए सोमवार को बैठक बुलाई थी। बैठक में शामिल तमाम पार्टी के नेताओं ने कहा कि चुनावी घोषणा पत्र में जनता के लिए घोषणाएं करना उनका संवैधानिक अधिकार है।

उच्चतम न्यायालय ने 5 जुलाई को एक फैसले में कहा था कि राजनीतिक दलों द्वारा चुनावी घोषणापत्र में मतदाताओं को मुफ्त उपहार (साइकिल, लैपटॉप, टीवी) देने का वायदा करना निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
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न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को राजनीतिक दलों के घोषणापत्र में इस तरह के आश्वासनों को रोकने के लिए जरूरी दिशा निर्देश बनाने को भी कहा था। बैठक में शामिल नेताओं ने पार्टियों द्वारा घोषणा पत्र में जनता से किए जाने वाले वायदों को सही करार दिया।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डी राजा ने कहा कि राजनीतिक दलों की ओर से जनता से किए जाने वाले वायदे सही हैं तथा संविधान भी इसकी अनुमति देता है। यह राजनीतिक दलों को तय करना है कि वे अपने वायदों को कैसे पूरा करते हैं।

भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस मुद्दे को जनता पर छोड़ देना चाहिए। चुनाव में धनबल के दुरुपयोग पर चर्चा होनी चाहिए। जहां तक चुनावी घोषणा के अनुरूप जनता को कुछ चीजें दिए जाने की बात है, इस पर खुद लोगों को फैसला लेने देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में एक राजनीतिक पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में जनता से मुफ्त टेलीविजन तथा केबल कनेक्शन देने का वायदा किया था फिर भी वह हार गई। इस तरह भाजपा ने भी घोषणा पत्र पर गाइड लाइन के उच्चतम न्यायालय के सुझाव को सही नहीं माना है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त वीएस संपत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में छह राष्ट्रीय दलों के अलावा 25 राज्य स्तरीय पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।

इस बैठक से पहले कई दलों की ओर से आयोग को घोषणापत्र के लिए गाइड लाइन के संबंध में लिखित सुझाव भी मिले हैं। आयोग अभी कुछ अन्य संस्थाओं से भी इस संबंध में विचार विमर्श करेगा।
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