गोवा की गलियां छोड़ दिल्ली में केंद्र की राजनीति में हाथ आजमाने से झिझक रहे मनोहर परिकर पीएम नरेंद्र मोदी के समझाने के बाद तैयार हुए। इससे एक पखवाड़े पहले वह पार्टी आला कमान द्वारा केंद्रीय मंत्री बनने का प्रस्ताव ठुकरा चुके थे।
दरअसल मोदी भविष्य में होने वाले ताबड़तोड़ रक्षा सौदों के कारण उपजने वाले संभावित विवाद से निपटने के लिए रक्षा मंत्रालय का जिम्मा हर हाल में पाक-साफ छवि वाले परिकर को ही देना चाहते थे।
उल्लेखनीय है कि परिकर ने बदली परिस्थितियों में भले ही मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का जबर्दस्त समर्थन किया था, मगर गुजरात में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगे के लिए मोदी की आलोचना भी की थी।