सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मजबूत रखने की प्रतिबद्धता के साथ बैंकिंग विधि (संशोधन) विधेयक 2012 और प्रतिभूति हित का प्रवर्तन और ऋण वसूली विधि (संशोधन) विधेयक 2012 को संसद की मंजूरी मिल गई है।
राज्यसभा ने देश में नए बैंक खोलने का मार्ग प्रशस्त करने वाले इन विधेयकों पर सम्मिलित चर्चा के बाद दोनों को ध्वनिमत से पारित कर दिया। वामदलों ने इन विधेयकों पर सरकार के जवाब से असंतोष जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
उच्च सदन ने बैंककारी विधि ‘संशोधन’ विधेयक पर माकपा के तपन कुमार सेन और एन बालगोपाल की ओर से लाए गए संशोधनों को ध्वनिमत से नकार दिया। लोकसभा इन दोनों विधेयकों को पहले ही पारित कर चुकी है।
उच्च सदन में वित्त मंत्री ने दोनों विधेयकों पर हुई सम्मिलित चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि भारत के पास कम से दो से तीन बैंक ऐसे होने चाहिए जो वैश्विक आकार वाले हों।
उन्होंने इन आशंकाओं को खारिज किया कि बैंकिंग संशोधन विधेयक से देश की 16 हजार से अधिक सहकारी बैंकों पर कोई असर नहीं पडे़गा। उन्होंने कहा कि आरबीआई दिशा निर्देश तैयार करते समय इन बैंकों का ख्याल रखेगा।