केंद्र सरकार ने ड्यूटी के दौरान मारे जाने वाले पैरामिलिट्री और पुलिस बल के जवानों और अधिकारियों को शहीद का दर्जा देने का निर्णय लिया है।
इसकी मांग काफी लंबे अरसे की जा रही थी। हालांकि इस संदर्भ में अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना या आदेश नहीं आया है।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह ने कहा कि मंत्रालय इस पर काम कर रहा है। सरकार ने केंद्रीय पैरामिलिट्री और पुलिस बलों के अधिकारियों और जवानों को शहीद का दर्जा देने का फैसला कर लिया है लेकिन राज्य सरकारों से राज्य पुलिस बलों के लिए फैसले के अनुमोदन का इंतजार है।
सिंह के मुताबिक, केंद्र सरकार इस संदर्भ में पहले ही राज्यों को पत्र लिख चुकी है। पैरामिलिट्री और केंद्रीय पुलिस बलों ने गृह मंत्रालय से कहा था कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से लेकर सीमा तक मदद करने वालों जवानों को शहीद का सम्मान देने से न केवल उनका मनोबल बढे़गा बल्कि उनका स्वाभिमान भी बढ़ेगा।
मौजूदा वक्त में केंद्रीय पुलिस बलों के मारे गए जवानों के परिजनों को केवल पेंशन से जुड़े लाभ देने और गैलेंट्री व पुलिस मेडल से सम्मानित किए जाने का हक है।
सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ और आरपीएफ के करीब 9 लाख जवानों वाले पैरामिलिट्री बलों की शहीद का दर्जा दिए जाने की लंबे समय से मांग थी, जिसके जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है। पिछली 2011 में हुई बैठक में इस मसले पर सहमति नहीं बन पाई थी।