पाकिस्तानी नागरिक को शिक्षिका बनाए जाने के मामले में प्रमुख सचिव गृह के सामने शुक्रवार को डीएम-एसपी समेत अन्य अधिकारी पेश हुए। प्रमुख सचिव ने जब अफसरों से नियुक्ति के लिए किए गए आवेदन की प्रति मांगी तो अफसर बगले झांकने लगे। प्रमुख सचिव (गृह) ने शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। डीएम को पूरी जानकारी के साथ आने के निर्देश दिए।
गंज थाना क्षेत्र के बगीचा चौधरान निवासी फरजाना सैदनगर क्षेत्र के स्कूल में शिक्षिका हैं। एलआईयू ने कुछ समय पहले शासन को एक रिपोर्ट भेजी थी। इसमें कहा गया था कि फरजाना पाकिस्तानी नागरिक हैं। वह यहां पर बेसिक शिक्षा विभाग में बतौर सहायक अध्यापिका तैनात हैं।
बताया जाता है कि शहर कोतवाली क्षेत्र के आतिशबाज मोहल्ला निवासी अख्तर अली की बेटी फरजाना उर्फ माहिरा का 17 जून 1979 में पाकिस्तान निवासी सिबरात अली से निकाह हो गया था। वह पाकिस्तान चली गई थीं। निकाह के तीन साल बाद दोनों के बीच तलाक हो गया। उसने दो बेटियों को भी जन्म दिया।
अफसरों के पास नहीं है आवेदन की प्रतिलिपि
तलाक के बाद दोनों बेटियों के साथ फरजाना रामपुर आकर मायके में रहने लगी। वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी वह यहां रह रही थी। एलआईयू ने इस पर शहर कोतवाली में मुकदमा कायम कराया।
कोर्ट ने 1985 में उसे कोर्ट की समाप्ति तक मौजूद रहने सजा सुनाई। इसके बाद एलआईयू को इस बात की जानकारी हुई कि उक्त महिला रामपुर में शिक्षिका के पद पर तैनात है। रिपोर्ट शासन को भेजी। शासन ने पिछले दिनों आदेश जारी कर डीएम-एसपी के साथ ही बीएसए को तलब किया था।
शुक्रवार को प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पांडा के समक्ष अफसरों की पेशी हुई। अफसरों ने अपना पक्ष रखा। साथ ही कई पत्रावलियां भी पेश कीं। बीएसए से शिक्षिका की नियुक्ति के लिए मांगे गए आवेदन की प्रतिलिपि मांगी गई। कोई भी अफसर प्रतिलिपि नहीं दे सका। अफसरों ने प्रमुख सचिव से मोहलत मांगी है।
आखिर क्या है फरजाना की गलती
प्रमुख सचिव गृह ने अधिकारियों को पूरी जानकारी के साथ फिर से आने को कहा है। वहीं, बेसिक शिक्षा विभाग ने मामले में शिक्षिका के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है। विभाग का मानना है कि शिक्षिका ने भ्रमित किया है।
फरजाना के पाकिस्तानी नागरिक होने के बाद भी सरकारी स्कूल में नौकरी करने के मामले में कई अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। हालांकि यह मामला बहुत पुराना है।
फरजाना की गलती इतनी है कि पाकिस्तान से वापस आने के बाद उसने अपनी वहां की नागरिकता वापस नहीं की। यह मामला कई अधिकारियों के संज्ञान में रहा है। इसके बाद भी फरजाना को सरकारी नौकरी कैसे मिल गई। इस बात की जांच कराई जा रही है।