पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने भारत पर लगाया है बड़ा आरोप। पाकिस्तान उच्चायुक्त ने कहा कि भारत की ओर से भी सीजफायर का उल्लंघन किया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत ने 57 बार सीजफायर का उल्लंघन किया है।
वह एक प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थे। उन्होंने एक सवाल ये जवाब में ये आरोप लगाया। उनसे पाकिस्तान की ओर से सीजफायर के उल्लंघन को लेकर सवाल पूछा गया था।
उन्होंने ना सिर्फ भारत पर गंभीर आरोप लगाए बल्कि उन्होंने कश्मीर को विवादित क्षेत्र भी करार दे दिया। अब देखना ये होगा कि भारत इस पर क्या रुख अपनाता है।
इससे पहले भारत सरकार की नाराजगी और विरोध से बेपरवाह पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने मंगलवार को कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से मुलाकात का सिलसिला भी जारी रखा।
कश्मीर विवादास्पद क्षेत्र है: पाक उच्चायुक्त
भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने एक बार फिर दोहराया है कि जम्मू-कश्मीर विवादास्पद क्षेत्र है, लिहाजा इस मुद्दे पर सभी पक्षों से बातचीत करना जरूरी है। उन्होंने कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से बातचीत के मसले पर कहा, "यह लंबे समय से चली आ रही प्रक्रिया थी।"
साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान, भारत के साथ अच्छे संबंध चाहता है।
नई दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया को संबोधित करते हुए अब्दुल बासित ने कहा, "दोनों देशों के बीच सचिव स्तर की बातचीत को रद्द किए जाने से दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा"
'पाक भी आतंकवाद से पीड़ित'
भारत ने 25 अगस्त से प्रस्तावित इस बातचीत को रद्द करने का फ़ैसला लिया था। अब्दुल बासित ने ये भी दोहराया कि पाकिस्तान भी आतंकवाद से पीड़ित है, ऐसे में दोनों देशों के बीच आपसी रिश्तों के बेहतर होने से ही दोनों देशों की तरक्की संभव है।
पाकिस्तानी उच्चायुक्त के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी संबंध बेहतर होने का असर सार्क देशों के संबंधों पर भी पड़ेगा।
पाकिस्तान की ओर से सीज़फायर के उल्लंघन के मामले पर उन्होंने कहा कि भारत की ओर से भी पिछले दिनों 57 बार सीज़फायर का उल्लंघन हुआ है।
भारत की नाराजगी से बेपरवाह पाकिस्तानी उच्चायुक्त
सोमवार को अलगाववादी नेता शब्बीर शाह के बाद मंगलवार को हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी, जेकेएलएफ नेता यासीन मलिक और मीरवाइज उमर फारूक ने भी बासित से अलग-अलग मुलाकात की।
मुलाकात के बाद इन नेताओं ने दोनों देशों के बीच 25 अगस्त को होने वाली विदेश सचिव स्तर की वार्ता को रद्द किए जाने के भारत सरकार के फैसले की निंदा की। सोमवार को बासित-शब्बीर की मुलाकात के तत्काल बाद भारत ने वार्ता रद्द करने की घोषणा कर दी थी।
विदेश सचिव स्तर की बातचीत रद्द करने के फैसले को विदेश नीति और घरेलू मामलों में संघ के बढ़ते असर का नतीजा माना जा रहा है। संघ के इस रुख से आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर भारत के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ जाने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे कदमों का वैश्विक असर दिख सकता है।
अलगाववादी नेताओं ने भारत सरकार पर साधा निशाना
इस मुलाकात से पहले विदेश सचिव सुजाता सिंह ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त को दो टूक शब्दों में कहा था कि पाकिस्तान वार्ता के लिए या तो भारत सरकार को चुने या अलगाववादी नेताओं को। भारत सरकार की नाराजगी की कोई परवाह न करते हुए पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने मंगलवार को भी कश्मीर के तीन अलगाववादी नेताओं से मुलाकात की।
हालांकि इस मुलाकात के संबंध में पाकिस्तानी उच्चायोग की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है, मगर अलगाववादी नेताओं ने मुलाकात के बाद भारत सरकार पर निशाना साधा। गिलानी ने तो यहां तक कहा कि वार्ता रद्द करने के फैसले से साफ है कि भारत पाकिस्तान से रिश्ते सुधारना नहीं चाहता।
उन्होंने कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बताया और कहा कि कश्मीर मामले के हल के बिना घाटी में शांति बहाली नहीं होगी। गिलानी ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त से बातचीत को नियमित और सामान्य प्रक्रिया बताया। यासीन मलिक ने भी मोदी सरकार पर तंगदिली का आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान से वार्ता न करने के लिए भारत ने कश्मीरी नेताओं से पाकिस्तानी उच्चायुक्त की मुलाकात का बहाना बनाया है।
'पाकिस्तान नहीं सुधारना चाहता रिश्ते'
भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि मोदी जी ने पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने की शुरुआत की थी। पाकिस्तान जब तक गोलियां चलाएगा तब तक बात कैसे होगी?
इससे पहले मंगलवार को उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान की अलगाववादियों और भारत सरकार से वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकती है। सरकार ने इस बारे में पाकिस्तान को पहले ही सचेत किया था। चूंकि पाकिस्तान की भारत के साथ रिश्ते सुधारने में दिलचस्पी नहीं है, इसलिए वार्ता से ठीक पहले उसने जानबूझ कर उकसावेपूर्ण नीति के तहत अलगाववादियों से मुलाकात का सिलसिला शुरू कर दिया।
कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से बातचीत के लिए माहौल बनाने की कोई कोशिश नहीं की गई थी। उल्टे सीमा पर सीजफायर उल्लंघन जारी है तो कश्मीर में आतंकी हमले हो रहे हैं। फिर बातचीत किस आधार पर शुरू की जा रही थी। मोदी सरकार को देश को इस बात का जवाब देना चाहिए। सरकार को अपनी विदेश नीति का भी खुलासा करना चाहिए।
'कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा'
हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बताते हुए कहा है कि इस समस्या के हल के बिना कश्मीर घाटी में शांति स्थापित करना संभव नहीं है। पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित से मुलाकात से पहले और बाद में गिलानी ने विदेश सचिव स्तर की वार्ता को रद्द करने के भारत सरकार के फैसले को बचकाना करार दिया।
इस दौरान गिलानी ने घाटी में कश्मीर पंडितों की घर वापसी के कार्यक्रम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कोई कश्मीर पंडितों की घर वापसी के विरोध में नहीं है। कश्मीरी पंडितों का भी घाटी में उतना ही हक है जितना खुद उनका। उल्लेखनीय है कि सोमवार को पाकिस्तानी उच्चायुक्त की कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से मुलाकात से नाराज भारत ने 25 अगस्त को होने वाली विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द कर दी थी।
नरेंद्र मोदी पर साधा निशाना
भारत ने इस मुलाकात को देश के आंतरिक मामले में सीधा हस्तक्षेप करार दिया था। यह घोषणा तब की गई जब बासित ने अलगाववादी नेता शब्बीर शाह से मुलाकात की थी। गिलानी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों को यह समझ लेना चाहिए कि जब तक इस समस्या का समाधान नहीं होगा तब तक कश्मीर घाटी में शांति बहाली नहीं होगी।
जहां तक कश्मीरी नेताओं के पाकिस्तानी उच्चायोग में आने जाने और बातचीत की बात है तो यह कोई असामान्य घटना नहीं है। गिलानी ने खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार बनाते समय प्रधानमंत्री ने कहा था कि वह अपने पूर्ववर्ती अटल बिहारी वाजपेयी के पदचिन्हों पर चलेंगे। उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में भी कश्मीरी नेताओं का पाकिस्तानी उच्चायोग में आना जाना था और उस दौरान भी इस तरह की बातचीत हुई थी।
'कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं'
विदेश सचिव वार्ता रद्द किए जाने पर पाकिस्तान ने कहा है कि पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने भारत के अंदरूनी मामलों में कोई दखल नहीं दिया है। पाक विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तसनीम असलम ने कहा कि पाकिस्तान भारत के अधीन नहीं है। पाक एक संप्रभु राष्ट्र है और जम्मू-कश्मीर विवाद में उचित पक्ष भी। कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है। यह विवादित क्षेत्र है। वहीं, पाकिस्तानी मीडिया ने वार्ता रद्द होने को शांति के लिए बड़ा झटका बताया है।