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मोदी शरीफ के रिश्ते पर पाक सेना का रूख नहीं है साफ

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के औचक लाहौर में रुकने और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ से पनप रहे आपसी तालमेल पर पाक सेना का रुख क्या होगा यह फिलहाल साफ नहीं है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पाक सेना भारत-पाक की बढ़ती नजदीकियों में अभी अड़ंगा नहीं डालेगी।
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पाक सेना के इस रुख के लिए दोनों नाभकीय पड़ोसियों के बीच सुचारु संबंध ठोस करने के अंतररराष्ट्रीय दबाव को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। विदेशी मामलों के विशेषज्ञ एवं भारत के पूर्व विदेश सचिव रह चुके शशांक का मानना है कि वैसे भी पाक सेना की नजर हमेशा वार्ता के परिणाम पर होती है।

शशांक के मुताबिक नए अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के मद्देनजर पाक सेना अपने प्रतिकूल नतीजे के सूरत में ही खेल बिगाड़ने का जोखिम उठाएगी। गौरतलब है कि वहां की सेना कश्मीर और सियाचिन पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगी। अब यह देखाना दिलचस्प होगा कि मोदी और शरीफ के नए प्रयोगों पर पाक सेना प्रमुख राहिल शरीफ का क्या रुख होता है।
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कई नाजुक मौकों पर बिगाड़ा खेल

खुफिया विभाग के पाकिस्तान डेस्क के अधिकारी के मुताबिक अफगानिस्तान में भारत की बढ़ती मौजूदगी और पाकिस्तान में आतंकवाद की गहरी होती पैठ के मद्देनजर राहिल शरीफ फिलहाल कोई दुस्साहस नहीं करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक पाक सेना की पेरिस हमले के बाद आतंकवाद के खिलाफ बनी अंतरराष्ट्रीय गोलबंदी पर भी पैनी नजर है। चूंकि भारत और पाकिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार इस गोलबंदी में काफी मुखर है। लिहाजा पाक सेना दोनों देशों के बीच के संबंधों को बिगाड़ कर विलेन की भूमिका में आने के बचेगी।

अधिकारी ने करगिल का उदाहरण देते हुए कहा कि पाक सेना ने ऐसे कई नाजुक मौकों पर खेल बिगाड़ा है जहां से भारत पाक के बीच संबंध ऐतिहासिक रास्ते पर चलने को तैयार थे।
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