सेना और कट्टरपंथियों को नजरअंदाज करते हुए नवाज शरीफ के भारत आने के फैसले ने मनोनीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए विदेश यात्रा की शुरुआत पाकिस्तान से करने का रास्ता साफ कर दिया है।
हालांकि लश्कर-ए-ताइबा जैसे आतंकी और कट्टरपंथी संगठनों ने शरीफ के फैसले का खुला विरोध कर साफ कर दिया है कि वह इस रास्ते में कांटे बिछाने की कोशिश करेंगे।
प्रॉक्सी वॉर का सहारा ले सकता है ISI
सुरक्षा एजेंसियां परमाणु क्षमता वाले दो पड़ोसियों के प्रधानमंत्रियों के सकारात्मक कूटनीतिक कदमों से पूरी तरह सचेत हो गई हैं। खुफिया एजेंसी रॉ और आईबी को अंदेशा है कि पाक सेना और आईएसआई एक बार फिर प्रॉक्सी वॉर का सहारा लेते हुए 26/11 जैसे हमले करेगा, ताकि भारत खुद बातचीत के रास्ते से पीछे हट जाए।
आईबी के उच्चपदस्थ सूत्र ने बताया कि इन हालात को रोकना दोनों सरकारों के लिए बड़ी चुनौती साबित होने जा रहा है।
अधिकारी के मुताबिक अगर मोदी और शरीफ मिलकर क्षेत्र में आर्थिक विकास के एजेंडे पर काम करना चाहते हैं तो उन्हें अपने यहां मौजूद परस्पर विरोधी खेमों को किसी भी कीमत पर काबू में रखना पड़ेगा।
पाकिस्तान का रवैय्या उत्साहजनक नहीं
अधिकारी ने बताया कि भारत में भी एक बड़ा तबका है जो इतिहास का हवाला देते हुए शरीफ पर आंख मूंद कर भरोसा करने के पक्ष में नहीं है। उनका मानना है कि पाक अदालत में चल रहे 26/11 हमले के मुकदमे में वहां की सरकार ने कोई उत्साहजनक काम नहीं किया है।
ऐसे में पाक की तरफ दोस्ती का कदम बढ़ाना अच्छी कूटनीति नहीं है।
दूसरी तरफ भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने कहा है कि दोनों पीएम मजबूती से बातचीत के रास्ते पर चलते रहें तो इन ताकतों का मुकाबला किया जा सकता है।
साथ ही आर्थिक विकास के रास्ते पर चलते हुए कश्मीर और सियाचिन जैसे जटिल मुद्दों को भी सुलझाया जा सकता है।
हालात पर गंभीर मंत्रणा होगी
सूत्रों के मुताबिक पाक विदेश मंत्रालय और शरीफ के प्रधानमंत्री कार्यालय ने पाक सेनाध्यक्ष जनरल राहील शरीफ को भारत से अच्छे संबंध के फायदे समझाएं हैं। लेकिन सेना की मौन हामी का यह मतलब नहीं लगाया जाना चाहिए अब सब कुछ ठीक रहेगा।
विदेश मंत्रालय के उच्चपदस्थ अधिकारी ने बताया कि मोदी और शरीफ के बीच 27 मई को होने वाली मुलाकात में इन हालात पर गंभीर मंत्रणा होगी।