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भारत का जवाब, खुद की वजह से बदहाल है पाक

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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के मंच से कश्मीर का मुद्दा उठाने पर भारत ने पलटवार किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने शरीफ के कश्मीर मुद्दे पर दिए बयान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पाक आतंकवादियों से ज्यादा अपने नीतियों की वजह से पीड़ित है।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, 'पाक प्राथमिक रूप से आतंकवाद से नहीं अपने नीतियों की वजह से पीड़ित है। वह आतंकवाद का मुख्य प्रायोजक है।' स्वरूप ने यह भी लिखा कि कश्मीर से सेना को हटाने से कोई समाधान नहीं होगा बल्कि पाकिस्तान से आतंकवाद को हटाने की जरुरत है। पाकिस्तान में इस वक्त जो अस्थिरता का माहौल है वह उसके खुद की देन है जिसने अपनी जमीन पर आतंकवाद को पनपने दिया। इस अस्थिरता के लिए अपने पड़ोसी देशों पर आरोप लगाना सही नहीं है।
Pakistan is not primary victim of terrorism but of its own policies. It is in fact the prime sponsor of terrorism.— Vikas Swarup (@MEAIndia) September 30, 2015
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गौरतलब है कि नवाज शरीफ ने यूएन के मंच से कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए भारत के सामने चार शर्तें रखीं। हालांकि, यह पूरी तरह से 1972 में हुए शिमला समझौते का उल्लंघन था। लेकिन यूएन में कश्मीर के मुद्दे को उठाने को समझौते के उल्लंघन के तौर पर देखा जा रहा है।
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क्या कहा था शरीफ ने?

पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने बुधवार देर रात को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कश्मीर का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि 1947 से यह मुद्दा अनसुलझा ही रह गया है। शरीफ ने कश्मीर मसले के शांतिपूर्ण हल के लिए चार सूत्री प्रस्ताव भी पेश किया, जिसमें कश्मीर और सियाचिन से बिना शर्त सेनाओं को हटाने की बात शामिल है।

पाक पीएम ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में सेना हटाए जाने की वकालत करते हुए कहा कि कश्मीर मसले का शांतिपूर्ण हल निकलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमा पर सीजफायर एक बड़ा मसला है। कोशिश यह है कि इसका उल्लंघन न हो। यूएन में पाकिस्तान ने यह दर्शाने की कोशिश की कि वह भारत के साथ शांति की पहल करना चाहता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए पाक पीएम ने चार सूत्री यह प्रस्ताव दिया कि दोनों देशों को ‘किसी भी स्थिति में सैन्य कार्रवाई का इस्तेमाल करने या धमकी देने से बचना चाहिए।’

उन्होंने कहा कि सीमा पर 2003 के संघर्षविराम को बनाए रखने की कोशिश होनी चाहिए। ताकि दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच शांतिपूर्ण रिश्तों को सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा, ‘टकराव नहीं, बल्कि सहयोग से हमारे रिश्तों की पहचान होनी चाहिए।’
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