भारत-पाकिस्तान के बीच दिसंबर माह में होने वाली सीमित ओवरों की क्रिकेट सीरीज के लिए भारतीय प्रायोजक होने पर ही पाकिस्तानी क्रिकेट प्रेमियों को ही वीजा दिया जाएगा। यह कदम 2007 में हुई द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज देखने आए 12 पाकिस्तानी दर्शकों के गायब होने के चलते उठाया गया है। गृह मंत्रालय ने स्थानीय प्रायोजक होने की शर्त को अनिवार्य कर दिया है।
मंत्रालय का कहना है कि 25 दिसंबर से शुरू होने वाली क्रिकेट श्रृंखला के लिए उन्हीं पाकिस्तानी दर्शकों को वीजा दिया जाएगा, जिनके पास भारतीय प्रायोजक होगा। यह फैसला नवंबर-दिसंबर 2007 में दोनों देशों के बीच खेली गई क्रिकेट श्रृंखला के दौरान आए 12 पाकिस्तानी दर्शकों के स्वदेश नहीं लौटने के चलते लिया गया है। इन दर्शकों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि क्रिकेट प्रशंसकों को वीजा नियमों में कोई छूट नहीं दी जाएगी। हम अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं कर सकते हैं क्योंकि यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए यदि उन्हें वीजा चाहिए तो उनके पास स्थानीय प्रायोजक होना जरूरी है। यदि कोई एक से अधिक मैच देखना चाहता है तो उसका स्वागत है लेकिन उसे वीजा संबंधी शर्तों को पूरा करना होगा। साथ ही यदि श्रृंखला से पहले नया वीजा समझौता लागू होता है तो पांच शहरों का वीजा दिया जा सकता है।
हालांकि अभी पाकिस्तानी क्रिकेट प्रशंसकों के लिए वीजा की संख्या निर्धारित नहीं की है। वीजा आवेदक को 25 दिसंबर से अगले साल 6 जनवरी तक चलने वाली सीरीज के लिए टिकट की एक प्रति भी लगानी होगी। इस सीरीज में तीन वनडे और दो ट्वंटी-20 मैच खेले जाएंगे। ये मैच चेन्नई, कोलकाता, नई दिल्ली, बंगलूरू और अहमदाबाद में होंगे।
2011 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मैच देखने मोहाली आए सभी पाकिस्तानी क्रिकेट प्रशंसक स्वदेश लौट गए। हालांकि 2007 में आकर लापता हुए 12 पाक प्रशंसकों का अभी तक पता नहीं चला है। पाकिस्तानी अमेरिकी आतंकी डेविड हेडली ने पूछताछ में बताया था कि लश्कर ए ताइबा के कई आतंकियों ने 2007 भारत-पाक क्रिकेट सीरीज के लिए वीजा हासिल किया था। वहां पहुंचकर इन सभी ने नेशनल डिफेंस कॉलेज सहित दिल्ली में कई महत्वपूर्ण जगहों की टोह ली थी। इस श्रृंखला के मैच दिल्ली, कोलकाता, बंगलूरू, गुवाहाटी, मोहाली, कानपुर, ग्वालियर और जयपुर में खेले गए थे।