तमाम बदनामी के बावजूद आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा प्रमुख हाफिज सईद को पूरी दुनिया से बचाए रखना पाकिस्तान की मजबूरी हो गई है। इसकी वजह यह है कि खुद आतंकवाद से जूझ रहा पाकिस्तान कट्टरपंथियों और खूंखार तालिबानी आतंकी गुटों पर नकेल कसने के लिए सईद की संस्था जमात-उद-दावा के पूरे देश में फैले मजबूत नेटवर्क का इस्तेमाल करता है।
आतंकी गुट लश्कर के प्रमुख और पाकिस्तान सरकार के बीच हुए अघोषित करार के तहत सईद अपने भारत विरोधी एजेंडों को परवान चढ़ाता है। यह पाकिस्तान की सरकारी पॉलिसी को भी पूरी तरह रास आ रहा है। इसके बदले जमात-उद-दावा की छत्रछाया में फल फूल रहे लश्कर जैसे आतंकी संगठनों ने पाकिस्तान की सरजमीं पर कोई आतंकी हमला नहीं करने का करार कर रखा है।
इसी के तहत सईद ने अमेरिका के खिलाफ भी अपने तथाकथित जेहाद से भी हाथ खींच रखा है। यही कारण है कि लश्कर को ब्लैक लिस्ट करने के बावजूद अमेरिका ने पाकिस्तान से सईद पर सख्ती की मांग करनी बंद कर दी है।
खुफिया विभाग में पाकिस्तान मसलों पर लंबे समय से काम कर रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि पाकिस्तान ने ऐसा ही करार जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के साथ किया था।
गौरतलब है कि तालिबान की मदद से पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कांधार विमान अपहरण के बंधकों के बदले मसूद अजहर को भारत से वापस लिया था। अजहर जम्मू और कश्मीर की जेल में बंद था। वहां की सरकार ने इसी मसूद की मदद से दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हमला करवाया।
लेकिन जल्द ही मसूद पाकिस्तान में नई इस्लामी व्यवस्था कायम करने के नाम पर अमेरिका विरोधी रवैया अपनाते हुए अल कायदा समर्थित तालिबान व खूंखार लश्कर-ए-झंगवी जैसे संगठनों के साथ पाकिस्तानी सरकार को ही आंख दिखाने लगा। तब आईएसआई ने मसूद को फंड देना बंद कर उसे कमजोर कर दिया। लेकिन इन कट्टरपंथी और आतंकी संगठनों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ हमलों का दौर जारी रखा है।
अधिकारी के मुताबिक सईद को पाक सरकार ने एक और अहम जिम्मेदारी दे रखी है। दरअसल पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में मौजूद हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे पुराने कश्मीरी आतंकी संगठनों के ज्यादातर लड़ाके चालीस पचास की उम्र पार कर रहे हैं और जम्मू-कश्मीर के सुधरे हालात की वजह से वापस आकर जिंदगी संवारना चाह रहे हैं।
यही वजह है कि पीओके के कैंपों में कश्मीरी लड़कों की नए सिरे से बहाली के लिए सईद अक्सर वहां के चक्कर लगाता है। एलओसी पर भारतीय जवान के सिर काटने की पाक सेना की करतूत के चार पांच दिन पहले पीओके में सईद की मौजूदगी की जानकारी भारतीय खुफिया एजेंसी को लगी थी।