फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पाकिस्तान ने टुंडा के बहाने थमाया ‘खाली कारतूस’

Mon, 26 Aug 2013 12:05 AM IST
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र
विज्ञापन
विज्ञापन
आतंकी अब्दुल करीम टुंडा की गिरफ्तारी के मामले में भले ही देश में चौतरफा शोर मच रहा हो, मगर हकीकत यह है कि इस बहाने पाक ने भारत को ‘खाली कारतूस’ थमा दिया है।
विज्ञापन


टुंडा ऐसा कारतूस है जो पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के किसी काम की नहीं रह गया था। यही कारण है कि आईएसआई ने इलाज के बहाने टुंडा को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भेज कर गिरफ्तारी का मार्ग प्रशस्त कराया।

आईएसआई को पता था कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में यूएई टुंडा को गिरफ्तार कराने में आनाकानी नहीं करेगा। अब टुंडा के बहाने पाक दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह भारत से संबंध सुधारने को सकारात्मक कदम उठा रहा है।
विज्ञापन


इसके साथ ही पाकिस्तान ने 20 अति वांछित आतंकियों को भारत को सौंपने की बड़ी मांग को किनारे करने और द्विपक्षीय वार्ता शुरू करने का दबाव बनाया है। इस तथ्य को अब खुफिया एजेंसियों के साथ ही विदेश मंत्रालय भी दबी जुबान स्वीकार कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि द्विपक्षीय वार्ता शुरू करने के अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच भारत ने पाक में छिपे 20 अतिवांछित आतंकियों को सौंपने की मांग पर दबाव बनाना शुरू किया था।

भारत के इस कूटनीतिक दांव से पाक अंतरराष्ट्रीय दबाव में भी आ गया था। इसी से बाहर आने के लिए आईएसआई ने किसी काम के नहीं रह गए आतंकी टुंडा को भारत के हवाले करने की रणनीति बनाई।

सूत्रों के मुताबिक लंबे समय से बीमार टुंडा को आईएसआई ने इलाज के बहाने यूएई भेजा।

उसे पता था कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में यूएई टुंडा को भारत के हवाले करने में आनाकानी नहीं करेगा। आईएसआई की रणनीति कामयाब रही और यूएई ने नेपाल के रास्ते टुंडा को भारत के हवाले कर दिया।

आईएसआई ने अपने इस दांव से हाफिज सईद, मसूद अजहर और दाउद इब्राहिम जैसे अन्य आतंकियों को सौंपने की भारत की मांग को फिलहाल पीछे धकेल दिया है।

टुंडा से नहीं मिलेगी कोई नई जानकारी
विदेश मंत्रालय के सूत्र के मुताबिक टुंडा से कोई नई जानकारी हासिल नहीं होगी। भारत ही नहीं दुनिया को पता है कि आईएसआई और पाक सेना की आतंकियों से मिलीभगत है।

अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन में अमेरिका को भी इसका अहसास हो गया है। इसलिए टुंडा की स्वीकारोक्ति और इससे संबंधित तथ्य कूटनीतिक दृष्टि से भारत के बहुत ज्यादा काम नहीं आने वाले।

पाक की नीति ‘यूज एंड थ्रो’
पाक और आईएसआई किस तरह ‘यूज एंड थ्रो’ की नीति अपनाती है, टुंडा इसका उदाहरण है।

पूछताछ में पता चला है कि कई रोगों से पीड़ित टुंडा आईएसआई के रवैये से काफी आहत है। वह खुद भी अपनी जिंदगी से आजिज आ चुका है। आईएसआई लगभग ढाई दशक तक भारत में आतंकवाद की आग भड़काने में टुंडा की मदद लेने के बाद इलाज में भी आनाकानी करती रही।
विज्ञापन


बकौल टुंडा हृदय संबंधी रोग के इलाज के लिए वह आतंकी संगठनों के मुखिया और आईएसआई के सामने बीते कई सालों तक गिड़गिड़ाता रहा।

उसकी इलाज की तो व्यवस्था नहीं हुई, मगर आईएसआई ने उसके बेटे को कश्मीर विरोधी मिशन में शामिल कर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें