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'कैलाश को बधाई देता पाक तो क्या हो जाता'

Sat, 11 Oct 2014 03:26 PM IST
वुसतुल्लाह खान/बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान
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सिवाए उनके जिन्हें किसी भी हाल में खुश रहना नहीं आता और जिनकी किस्मत में ही 'हाय बावेला' लिखा हुआ है, सब खुश हैं।
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आज ही मुझे फिजिक्स में नोबेल पुरस्कार लेने वाला अब्दुस सलाम पाकिस्तानी याद आ रहा है जिसने इटली के 'ट्राइस्ट फिजिक्स इंस्टीट्यूट' में अपने देश के बच्चों के लिए बहुत से स्कॉलरशिप मंजूर करवा कर रखे थे लेकिन कोई नहीं गया।

जाना भी चाहता होगा तो माता-पिता ने अपनी इच्छा या किसी डर से नहीं भेजा होगा।

डॉक्टर सलाम एक साइंटिस्ट मगर अहमदिया, एक पाकिस्तानी मगर अहमदिया, एक इंसान मगर अहमदिया थे।

आज वो रबवाह शहर की जिस कब्र में दफन हैं, उसके ऊपर लगी तख्ती में अंग्रेजी में प्रोफेसर अब्दुस सलाम तो लिखा है, पर 'अ ग्रेट मुस्लिम साइंटिस्ट' में से 'मुस्लिम' अक्षर किसी ईमान वाले ने खुरच डाला है।
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'आई एम मलाला'

और डॉक्टर सलाम की बिरादरी में इतना साहस नहीं कि नई तख्ती लगा सके। हां, मलाला पाकिस्तान की बेटी है मगर कैसी बेटी है जो आज भी जान के खौफ से घर नहीं आ सकती है।

हां, मलाला ने पाकिस्तान का सिर ऊंचा कर दिया है, मगर मलाला की जीवनी- 'आई एम मलाला', कोई बुकशॉप वाला काउंटर पर सजा के तो दिखा दे।

हां, मलाला बहादुर हीरोइन है मगर जिस स्वात में वो जन्मीं, वहां पिछले साल ही एक कॉलेज का नाम 'मलाला डिग्री कॉलेज' नहीं रखा जा सका।

छात्र और छात्राएं कहती हैं कि तालिबान बम से उडा देंगे।

लेकिन अब तो सरकार के अनुसार तालिबान तितर-बितर हो गए हैं, चलो अब सरकार अपनी पाकिस्तानी बेटी के नाम पर किसी सडक का नाम रख दे, कोई डाक टिकट ही छाप दे। ये कैसी बेटी है जो बहादुर भी है मगर अकेली।

मुझे खुशी है कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और गृह मंत्री चौधरी निसार अली ने चेतावनी दी है कि भारत 'लाइन ऑफ कंट्रोल' पर अंधाधुंध गोलीबारी से बाज आ जाए वरना मामला बहुत बिगड जाएगा।

साथ ही उन्होंने मलाला को नोबेल पुरस्कार मिलने पर बहुत-बहुत बधाई दी है।

यार मोदी जी का तो मैं कुछ नहीं कर सकता पर आप तो ये कर सकते हैं कि भारत सरकार को एक तगडी चेतावनी देने के साथ-साथ कैलाश सत्यार्थी को भी थोडी सी बधाई दे देते।
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सत्यार्थी की पुरानी जंग

कैलाश ना तो कोई सेनाधिकारी हैं ना मुंह से शोले उगलने वाला कोई नेता या मंत्री।

अरे वही अपना कैलाश सत्यार्थी जो दस दिसम्बर को मलाला के हमकदम होकर नोबेल पुरस्कार लेगा और पूरा समारोह दक्षिण एशिया के इन खूबसूरत लोगों के नाम पर छततोड तालियां बजाएगा।

ऐ दिल्ली और इस्लामाबाद वालों तुम्हीं इतनी सी बात समझ नहीं आ रही तो बडे होकर क्या करोगे।

बीबीसी की सीनियर रिपोर्टर लिज डूसट ने कैलाश सत्यार्थी और मलाला यूसुफजई को नोबेल पुरस्कार मिलने पर क्या अच्छा ट्वीट किया है, "मलाला और कैलाश भविष्य की जंग लड रहे हैं, मगर उनके पाकिस्तान और भारत अभी तक एक घिसी-पिटी पुरानी जंग में उलझे हुए हैं।"
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