समलैंगिक संबंधों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ उठ रही आवाजों को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी दोनों का समर्थन मिल गया है।
साथ ही अब पूरी सरकार भी समलैंगिकता के समर्थन में खड़ी हो गई है।
सरकार ने भी खुलकर कह दिया है कि वह समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से निकालने के लिए सभी विकल्पों पर विचार कर रही है और शीर्ष अदालत में क्यूरेटिव याचिका दाखिल करना उनमें से एक विकल्प हो सकता है।
सोनिया ने बृहस्पतिवार को कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को पलटने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से निराशा हुई। लेकिन उन्हें उम्मीद है कि संसद इस मसले को सुलझाएगी और देश के सभी नागरिकों के अधिकारों की स्वतंत्रता की रक्षा करेगी, जिसमें वे नागरिक भी शामिल हैं जो इस फैसले से सीधे प्रभावित हुए हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हाईकोर्ट ने एक दमनकारी और अन्यायपूर्ण कानून को खत्म कर दिया था जो संविधान में उल्लेखित मूलभूत मानवाधिकारों का हनन करता था।
उन्होंने कहा कि संविधान ने हमें एक महान विरासत दी है। उदारवाद और खुलेपन की विरासत दी है, जो हमें किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रहों और भेदभाव का मुकाबला करने के लिए आपस में जोड़ती है।
वहीं राहुल ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि वह दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले से सहमत हैं, जिसने समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया था।
राहुल ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से मानते है कि ये व्यक्तिगत आजादी का मामला है। इन मामलों को लोगों पर छोड़ दिया जाना चाहिए। इसलिए इसे वैसे ही रहने दिया जाए।
उधर, वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार दिल्ली हाईकोर्ट के भारतीय दंड संहिता की धारा 377 पर दिए गए फैसले को बहाल करवाने के लिए सभी विकल्पों पर विचार कर रही है।
उधर, सोनिया और राहुल के इस मुद्दे पर रुख जाहिर करने के बाद कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी की इस मामले पर चुप्पी पर सवाल खड़ा कर दिया है।
कांग्रेस नेता संजय झा ने कहा कि आखिर मोदी इस मामले पर चुप क्यों है। उन्हें इस मसले पर अपना मत रखना चाहिए।