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'मशीन बताएगी कि माहवारी में है महिला'

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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश तभी संभव होगा, जब एक ऐसी मशीन का अविष्कार हो जाए, जो ये बता सके कि महिलाएं माहवारी में है या नहीं। केरल के मशहूर सबरीमाला मंदिर के संचालन समिति के प्रमुख ने ये बयान सप्ताह भर पहले दिया था। बयान विवादित था और विरोध होना तय था।
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त्रावणकोर देवाश्वम बोर्ड के प्रमुख प्रयार गोपालकृष्णन के बयान ने तूल पकड़ लिया है। फेसबुक पर बयान के विरोध में 'हैप्पी टू ब्लीड' अभियान शुरु हो चुका है। तमाम महिला संगठनों ने बयान पर नाराजगी जताई है।

मुल्क भर से महिलाएं ने सोशल मीडिया पर माहवारी से जुड़ी वर्जनाओं और मंदिर के महिला विरोधी रवैये के खिलाफ रोष जताया है। फेसबुक पर Happy To Bleed इवेंट आयोजित कर महिलाओं को मुहिम से जोड़ा जा रहा है।
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बयान के विरोध में फेसबुक पर शुरू हुआ अभियान

हेप्पी टू ब्लीड पेज पर दिए बयान में कहा गया है, 'सबरीमाला मंदिर के देवाश्वम प्रमुख ने लैंगिकवादी बयान दिया है कि जब शुद्घता की जांच करने वाली मशीन का आव‌िष्कार हो जाएगा और जांच लिया जाएगा कि महिला माहवारी में है या नहीं, तभी उन्हें मंदिर में प्रवेश देने पर विचार किया जाएगा।'

बयान में कहा है कि मंदिर ने महिला विरोध को और पुख्ता किया है और महिलाओं से जुड़े मिथकों को बढ़ावा दिया है।

ये अभियान शनिवार को शुरू किया गया। म‌हिलाओं से अपील की गई है कि पितृसत्तात्मक समाज के शर्मनाक खेल के विरोध के लिए प्लेकार्ड/सेन‌िटरी नेपकिन/हेप्‍पी टू ब्लीड लिखा चार्ट अभियान के पेज पर पोस्ट करें। अभियान से अब तक 200 से अधिक लोग जुड़ चुके हैं।
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ताकि मंदिर में न प्रवेश कर सके 'अशुद्घ' महिला

त्रावणकोर देवाश्वम बोर्ड के प्रमुख प्रयार गोपाल कृष्‍णन ने 13 नवंबर को कोल्‍लम प्रेस क्लब में एक सवाल के जवाब में कहा था कि महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत तभी दी जाएगी, जब एक ऐसी मशीन आ जाए जो उन्हें स्कैन करके बता सके कि वे 'शुद्घ' हैं या नहीं।'

उन्होंने कहा था कि ऐसी मशीनें आ चुकी हैं, जो स्‍कैन कर बता सकती हैं कि आप के पास हथियार हैं या नहीं। वैसे ही महिलाओं के शरीर को स्कैन करने वाली मशीनें भी आ जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा था कि मंदिर की सुरक्षा कड़ी की जाएगी ताकि कोई भी 'अशुद्घ' महिला प्रवेश न कर सके।

2006 में कन्‍नड़ अभिनेत्री गिरिजा लोकेश ने कहा था कि उन्होंने 1987 में सबरीमाला मंदिर के नियमों का उल्लंघन किया था और उसके गर्भगृह तक चली गई थीं। दिसंबर, 2010 में केरला पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इसी मामले में उन पर मुकदमा कर दिया था।
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