फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैग पर विपक्ष लामबंद, कांग्रेस की बोलती बंद

Tue, 13 Nov 2012 12:05 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) पर लगाम लगाने की सरकार की मंशा पर सियासी विवाद गरमा गया है। केंद्रीय मंत्री नारायणसामी की सफाई के बाद भी मामला थमता नहीं दिख रहा है। इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार पर ताबड़तोड़ हमला बोल दिया है।
विज्ञापन


भाजपा ने कहा कि कैग को कमजोर करने के सरकार के प्रयास का पार्टी संसद के अंदर और बाहर पुरजोर विरोध करेगी। वहीं, माकपा ने सरकार के इरादे पर सवाल उठाते हुए मंत्री के बयान को सरकार की मंशा करार दिया है। संसद के शीतकालीन सत्र से ठीक पहले सरकार ने विपक्ष को बैठे बिठाए नया मुद्दा दे दिया है। कैग के पर कतरने के नारायणसामी के बयान से सरकार के खिलाफ बिखरा विपक्ष एक बार फिर एकजुट होता दिख रहा है।

सोमवार को भाजपा और माकपा दोनों ने मिलकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उन्हें आशंका है कि मंत्री का बयान सरकार की मंशा हो सकती है। भाजपा ने सरकार को चेताया है कि कैग को कमजोर करने के किसी भी कदम का वह संसद के भीतर और बाहर पुरजोर विरोध करेगी।
विज्ञापन


उधर, चेन्नई में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडु ने कहा कि कांग्रेस जब भी संकट में होती है तो वह संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने में जुट जाती है। दूसरी ओर, माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि कांग्रेस का पुराना इतिहास रहा है कि जब भी कोई संस्था उस पर अंगुली उठाती है तो वह उसे खत्म कर देती है। पार्टी ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए संसद में इस मसले को जोर शोर से उठाने का ऐलान किया है।

इस बीच, कांग्रेस ने विवाद को थामते हुए सफाई दी है कि मंत्री के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। मंत्री के सफाई देने के बाद इस मसले को ज्यादा तूल नहीं दिया जाना चाहिए। साथ ही कांग्रेस ने कैग पर सलीके से निशाना साधते हुए कहा है कि कैग एक संवैधानिक संस्था होने के नाते सरकार की साथी है। कई दफा उसके तर्कों से सरकार सहमत नहीं होती। मगर इसका मतलब यह नहीं कि दोनों के बीच टकराव है।

कैग को बहुसदस्यीय बनाने की बात पर कांग्रेस प्रवक्ता संदीप दीक्षित ने कहा कि पार्टी ने इस मामले में कोई स्टैंड तय नहीं किया है। अभी कैग एक संवैधानिक संस्था है। शुंगलू समिति की सिफारिशों पर अमल करने या नहीं करने का फैसला सरकार को लेना है। इससे पार्टी का कोई संबंध नहीं है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें