लोकसभा में मंगलवार को विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईद और रमजान से बनाई गई दूरी और पशुपतिनाथ में चंदन की लकड़ी दान देने, पूजा पाठ करने को मुद्दा बनाया।
विपक्ष ने प्रधानमंत्री पर रमजान के दौरान इफ्तार पार्टी न देकर वर्षों से चली आ रही धर्मनिरपेक्ष परंपरा को तोड़ने का आरोप लगाते हुए ईद को न भूलने की नसीहत दी, तो सरकार ने विपक्ष को सस्ती राजनीति न करने की नसीहत दी।
स्पीकर ने यह मुद्द उठाने नहीं दिया
वहीं स्पीकर सुमित्रा महाजन ने यह कह इस मुद्दे को उठाने नहीं दिया कि सदन इफ्तार पार्टी मांगने की जगह नहीं है। इसके बाद भी सदन में देर तक हंगामा होता रहा और तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के सदस्यों ने वेल में आकर विरोध जताया।
हंगामे के बीच ही संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देशवासियों को ईद की शुभकामनाएं दी थी। लोकसभा में शून्यकाल के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने यह मामला उठाया।
ईद को लेकर विपक्षी का निशाना साधा
उन्होंने प्रधानमंत्री की नेपाल यात्रा की चर्चा करते हुए पशुपतिनाथ में की गई पूजा का जिक्र किया। बंदोपाध्याय ने कहा कि प्रधानमंत्री पशुपतिनाथ जाएं, पूजा करें, 2500 किलो चंदन और घी चढ़ाएं, यह अच्छी बात है। मगर उन्हें ईद मुबारक भी तो बोलना चाहिए।
इसके बाद कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री पर इफ्तार पार्टी की वर्षों पुरानी परंपरा को तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री का अधिकार है कि वह पशुपति-तिरुपति जाएं और पूजा करें, मगर उन्हें देश की धर्मनिरपेक्ष परंपराओं का भी ख्याल रखना चाहिए।
संसद में हुआ हंगामा खड़ा
उस धर्मनिरपेक्ष परंपरा की जिसका उन्हीं की पार्टी के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी पालन किया था। अधीर के इतना कहते ही सदन में हंगामा खड़ा हो गया।
संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने विपक्ष को सस्ती राजनीति न करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि सरकार सर्व धर्म समभाव में विश्वास रखती है।