नाथुला की राह पर हर-हर महादेव का नारा गूंजाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। मानसरोवर यात्रा के लिए भारतीय तीर्थयात्रियों का पहला जत्था इस नए रास्ते का इस्तेमाल करेगा। 22 जून को यह जत्था चीन के स्वायत्त तिब्बत क्षेत्र में प्रवेश करेगा। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मंगलवार को इस रास्ते से होकर मानसरोवर तक पहुंचने वाले पहले जत्थे को औपचारिक तौर पर रवाना किया।
पिछले साल सितंबर में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान मानसरोवर के लिए इस नए रास्ते को खोलने पर समझौता हुआ था। नाथुला भारत के सिक्कम प्रांत में पड़ता है। यहां से भारत की सीमा चीन के साथ मिलती है। हिंदू मान्यता के अनुसार हिमालय में 19,500 की उंचाई पर स्थित कैलास-मानसरोवर को भगवान शिव का निवास माना जाता है।
कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए मौजूदा रास्ते से तीर्थयात्रियों के लिए 18 जत्थे रवाना होंगे। इनमें से हरेक जत्थे में 60 तीर्थयात्री शामिल हैं, जबकि नए रास्ते से पांच जत्थे रवाना होंगे। हरेक जत्थे में 50 तीर्थयात्री होंगे। समुद्र तल से 4000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नाथुला दर्रे से गुजरने वाले रास्ते से मानसरोवर की राह काफी आसान हो जाएगी। उन बुजुर्गों के लिए यह रास्ता आरामदायक रहेगी, जो बस से यात्रा करेंगे।
नए रास्ते पर मोटर से होगी पूरी यात्रा
दिल्ली से तीर्थयात्रियों का पहला जत्था बागडोगरा जाएगा, जहां से यह सिक्किम की राजधानी गंगटोक होते हुए नाथुला पहुंचेगा। नए रास्ते में पूरी यात्रा मोटर से की जा सकेगी। उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से लेकर गुजरने वाले रास्ते में काफी पैदल यात्रा करनी पड़ती है।
सुषमा स्वराज ने नए रास्ते से मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्रियों को रवाना करते हुए कहा कि वह दो वजहों से काफी खुश हैं।
पहली तो यह कि उन्होंने पिछले साल बुजुर्ग तीर्थयात्रियों के लिए रास्ता सुगम बनाने का जो वादा किया था वह पूरा हुआ । खुशी की दूसरी वजह तीर्थयात्रियों पर दिख रही खुशी है। नया रास्ता न खुलने से शायद वे यह यात्रा नहीं कर पाते। पिछले साल विदेश मंत्रालय का कार्य संभालते ही मैंने यह वादा कर दिया था कि चीन से वैकल्पिक रास्ता खोलने पर बातचीत चल रही है।
इस रास्ते पर वाहन चलाने का वादा जल्द पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस नए रास्ते पर तीर्थयात्रियों की गतिविधियों पर पूरी नजर रखेगी और जहां कहीं भी मदद की जरूरत होगी तुरंत मिलेगी। अधिकारी तीर्थयात्रियों के साथ होंगे।
नाथुला का रास्ता भारत और चीन के राजनयिक संबंध में मील का पत्थर है। गौरतलब है कि लिपुलेख दर्रे से होकर गुजरने वाले मानसरोवर रास्ते से तीर्थयात्रियों का पहला जत्था 11 जून को रवाना कर दिया गया था।
मानसरोवर यात्रा से जुड़ी खास बात
दिल्ली से नाथुला के रास्ते मानसरोवर आने-जाने में 19 दिन लगेंगे। इनमें सिर्फ ढाई दिन पैदल चलना होगा। इस रास्ते की दूरी लगभग 3000 किमी है। दिल्ली से उत्तराखंड के लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर जाने-आने में 22 दिन लगते हैं।
इनमें से 12 दिन पैदल चलना पड़ता है जबकि दिल्ली से इस रास्ते की दूरी 854 किलोमीटर है। यात्रा के लिए 60 यात्रियों के 18 जत्थे उत्तराखंड के रास्ते रवाना होंगे। तो 50 यात्रियों के पांच जत्थे नाथुला के रास्ते जाएगें। नाथुला के रास्ते सिर्फ ढाई दिन पैदल चलना होगा।
चीन में रात-दिन तैयारी
बीजिंग। कैलास यात्रा के लिए तय हुए वैकिल्पक नाथुला मार्ग को तैयार करने के लिए चीन में रात-दिन काम हो रहा है। यहां 22 जून को तीर्थयात्रियों का पहला जत्था प्रवेश करेगा। चीनी अधिकारियों का कहना है कि नेपाल में आए भूकंप की वजह सीमावर्ती इलाकों में हुए भारी नुकसान के बावजूद यह काम समय से जल्द पूरा हो जाएगा। पिछले साल भारतीय राजदूत अशोक कंठ ने तिब्बत की यात्रा कर मानसरोवर यात्रा की तैयारियों पर वहां के अधिकारियों से बातचीत की थी।
कैलाश-मानसरोवर की यात्रा पर जा रहे लोग चीन की सरकार का दिल से धन्यवाद कर रहे हैं। इस मार्ग के जरिये बुजुर्ग भी यात्रा का पुण्य उठा पाएंगे। पहले जत्थे में 50 यात्रियों को रवाना किया गया है। इसमें अधिकांश बुजुर्ग हैं।- सुषमा स्वराज, विदेश मंत्री