मानव संसाधन विकास मंत्रालय देशभर में 600 नए पॉलीटेक्निक कॉलेज खोलेगा।
इन कॉलेजों की स्थापना पर केंद्र 4590 करोड़ रुपये खर्च करेगा। पॉलीटेक्निक कॉलेजों को बढ़ती बेरोजगारी से निपटने के लिए एक कारगर उपाय के रूप में पेश किया जाएगा।
पिछले एक दशक में उच्च शिक्षा में तकनीकी विषयों में स्नातकों की भरमार के बावजूद उद्योगों के समक्ष दक्ष कर्मचारियों का संकट बरकरार है।
देश में हर साल स्नातक की डिग्री हासिल करने वाले युवाओं में से 25 फीसदी बेरोजगार रह जाते हैं जबकि इतने ही लोग अल्परोजगार (अंडर इंप्लायमेंट) होते हैं।
मानव संसाधन मंत्रालय ने अब उच्च शिक्षा में रोजगारोन्मुख शिक्षा को बढ़ावा देने का फैसला लिया है।
योजना आयोग ने मंत्रालय के साथ हुई बैठक में अब तक उच्च शिक्षा में हुए विस्तार, उद्योगों की जरूरतों तथा बढ़ती बेरोजगारी के आंकड़ों पर चर्चा की तो कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन पर अभी तक ध्यान ही नहीं दिया गया था।
शिक्षा विभाग के आंकड़े कहते हैं कि देश में तकनीकी शिक्षा हासिल करने वाले स्नातकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा आगे यह और तेजी से बढ़ेगी।
बैठक में फैसला लिया गया कि दक्षता को बढ़ाने के लिए व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाए।
इसी क्रम में मानव संसाधन मंत्रालय ने सरकार की ओर से 300 नए पॉलीटेक्निक कालेज खोलने के साथ ही अन्य 300 पॉलीटेक्निक पीपीपी मोड में स्थापित करने का फैसला लिया है।
सरकार प्रत्येक कालेज पर 12.30 करोड़ खर्च करेगी। पीपीपी मोड के कालेजों को भी मंत्रालय तीन-तीन करोड़ रुपये प्रदान करेगा।
मानव संसाधन मंत्रालय ने पीपीपी के तहत सीधे उद्यमियों को स्थानीय जरूरत के हिसाब से कालेज की स्थापना करने का प्रस्ताव दिया है।
इसके साथ ही देश में पहले से स्थापित पॉलीटेक्निक कालेजों को अपग्रेड करने की भी योजना है। इस योजना के तहत कुल पांच सौ पॉलीटेक्निक कालेजों पर 1000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।