अगर आप भी माया कैलेंडर की महाविनाश की भविष्यवाणी पर भरोसा करके हलकान हो रहे हैं तो ये खबर आपको राहत दे सकती है। माया कैलेंडर के अनुसार 21 दिसंबर को महाविनाश में सब कुछ तबाह हो जाएगा, धरती पर अगर कुछ बचेगा तो वो होगा फ्रांस का गांव 'पिन डे बुगाराश'। जी हां, इस कथित तबाही में पूरी धरती पर केवल इसी गांव के लोग जीवित बचेंगे, ऐसा कहा जा रहा है।
बुगाराश की चोटी बनेगी महाप्रलय की गवाह
जाहिर तौर पर महाप्रलय में सब कुछ समाप्त होगा लेकिन दक्षिणी फ्रांस में फ्रांस के बुगाराश पर्वत की चोटी पर रहने वाले लोग महाविनाश से बच जाएंगे। मीडिया में इस तरह की चर्चा हो रही है कि लोग महाविनाश से बचने के लिए बुगाराश पर्वत के बीच बने इस गांव की ओर जा रहे हैं।
इसका कारण बुगाराश पर्वत की ऊंची चोटी है जिसके बारे में कहा जा रहा है कि ऊंचाई पर होने की वजह से चोटी पर रुके लोग महाविनाश से बच जाएंगे। इस खबर के फैलते ही हजारों लोग बुगाराश गांव की ओर निकल पड़े हैं। वैसे बुगाराश की चोटी के पास बसे इस गांव की आबादी महज 179 है। यहां के लोग शांतचित्त और प्रसन्न रहते हैं। महाविनाश की खबरों से गांव के लोग जरा भी परेशान नहीं है।
दूसरी तरफ इस गांव के बचने के चर्चे इतने फैल गए हैं कि फ्रांसीसी अधिकारियों ने 19 से 23 दिसंबर के बीच बाहरी लोगों के पर्वत की चोटी पर जाने पर रोक लगा दी है और न ही किसी भूमिगत रास्ते से वहां पहुंचा जा सकता है। केवल पिन डे बुगाराश गांव के स्थानीय निवासी ही बुगाराश पर्वत पर जा सकते हैं।
डेलीमेल में छपी खबर के अनुसार फ्रांस और अंडोरा के सीमा पास स्थित 1,230 मीटर की ऊंचाई पर स्थिति बुगाराश पर्वत इस पर्वतीय इलाके में सबसे ऊंचाई पर स्थित है। दो साल पहले भी महाविनाश में इस गांव के बचने की खबरे उठी थी। तब से कई लोग यहां डेरा डाले बैठे हैं। बाहरी लोगों के आने से बुगाराश गांव के लोग खासे परेशान हैं। उन्हें उम्मीद है कि एक बार 21 दिसंबर की तारीख निकल जाए तो बाहरी लोग यहां से अपना बोरिया बिस्तर समेट लेंगे।
कितना सटीक है माया कैलेंडर
कहा जाता है कि प्राचीन माया सभ्यता के काल में गणित और खगोल के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास हुआ था। अपने ज्ञान के आधार पर माया लोगों ने एक कैलेंडर बनाया था। कहा जाता है कि उनके द्वारा बनाया गया ये कैलेंडर इतना सटीक निकला है कि आज के सुपर कम्प्यूटर भी उसकी गणनाओं में 0.06 तक का ही फर्क निकाल सके और माया कैलेंडर के अनेक आकलन, जिनकी गणना हजारों सालों पहले की गई थी, सही साबित हुए हैं।