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नेता प्रतिपक्ष पर सदन बदल सकता है नियम: महाजन

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लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा है कि अगर किसी दल के सदस्यों की संख्या सदन के कुल सदस्यों की संख्या के 10 फीसदी से कम हो तो ऐसी स्थिति में नेता प्रतिपक्ष पद के लिए सदन नियमों में बदलाव कर सकता है।
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उन्होंने कहा कि स्पीकर के पास कोई व्यक्तिगत अधिकार नहीं होता। स्पीकर को भी नियमों का पालन करना पड़ता है। लोकसभा अध्यक्ष के लिए तय निर्देशों में कहा गया है कि सदन की कुल सदस्य संख्या के 10 फीसदी के बराबर सदस्य वाले दल को विपक्ष के नेता का पद दिया जाएगा।

सुमित्रा महाजन ने ली कानूनी राय

महाजन ने कहा कि अगर कोई इसमें बदलाव चाहता है तो इसे देखने के लिए एक समिति गठित की जा सकती है। लेकिन उन्हें नियमों का पालन करना होता है। वह इस बारे में कुछ नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि किसी दल को विपक्ष के नेता का पद देने का उनका फैसला निर्देशों पर आधारित होता है। इस बारे में स्पीकर को दिया गया निर्देश बिल्कुल साफ है। इस मामले में फैसला करने से पहले मैंने कानूनी राय भी ली।
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कांग्रेस का क्या है दावा?

कुल 543 सदस्यीय लोकसभा में कांग्रेस के 44 सांसद हैं और वह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन सदन में विपक्ष के नेता का पद हासिल करने के लिए उसके सदस्यों की संख्या 55 होनी चाहिए। हालांकि कांग्रेस यह दावा कर रही है कि चुनाव पूर्व गठबंधन के तहत यूपीए के 56 सदस्य हैं और विपक्ष के नेता पद पर उसका अधिकार बनता है। महाजन ने कहा कि वर्ष 1980 और 1984 के लोकसभा में कोई सांसद विपक्ष का नेता नहीं था।
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