गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी के साक्षात्कार से भले ही देशभर में बवाल मचा हो, लेकिन गुजरात के लोगों को इस पर कोई आश्चर्य नहीं है। मोदी समर्थक और विरोधी दोनों ही इस मामले में एक मत हैं कि गुजरात के सीएम एक तीर से दो निशाने साध रहे हैं।
मोदी के शासन में राज्य में हुए विकास और कानून-व्यवस्था की जमकर तारीफ करने वाले सुरेश भाई कहते हैं कि उनके सीएम ने कोई नई बात नहीं कही है। वह प्रखर हिंदुत्ववादी हैं, लेकिन उनके एजेंडे में विकास और सुशासन पहले है।
सुरेश इस बात से फिक्रमंद है कि मोदी के दिल्ली जाने पर कहीं गुजरात में विकास की गाड़ी न रुक जाए। कुछ इसी तरह की चिंता निजी कंपनी में एक्जीक्यूटिव के पद पर काम कर रही ऊषा को भी है। वह कहती हैं कि मोदी का विकल्प तैयार न करके भाजपा ने गलती की है।
मोदी के धुर विरोधी महागुजरात जनता पार्टी के महासचिव गोरधन झड़फिया ने कहा है कि नरेंद्र मोदी ने गुजरात में खुद के आगे भाजपा और संघ दोनों को बौना बना दिया है। वह अपने बराबर के किसी नेता को पनपने ही नहीं देना चाहते हैं।
मोदी के ताजा बयान पर झड़फिया कहते हैं कि मोदी दो नावों की सवारी कर रहे हैं। वह संघ और भाजपा के समर्थकों को हिंदुत्व की घुट्टी पिला रहे हैं तो युवा और शहरी मतदाताओं के सामने विकास पुरुष की छवि पेश कर रहे हैं।
झड़फिया कहते हैं कि मोदी का कौन सा रूप सही है, यह आज तक किसी के समझ में नहीं आया। उधर, अहमदाबाद शहर की मुस्लिम बस्तियों में मोदी के बयान पर खामोशी है। ज्यादा कुरेदने पर जाकिर और अहमद हुसैन जैसे लोग कहते हैं कि यह बयान देकर मोदी ने पुराने जख्म ताजा कर दिए हैं।