आजादी के छह दशक बाद भी देश में मुसलमानों की क्या स्थिति है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महज 33 फीसदी मुस्लिम आबादी के हाथों को काम मिला है। बाकी 67 फीसदी मुसलमान बेराजगारी में जी रहे हैं और किसी तरह दो जून की रोटी का बंदोबस्त कर रहे हैं।देश में पहली बार धार्मिक आधारित पर कामकाज के आंकड़े सार्वजनिक किए गए हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक 2011 की जनगणना के बाद धर्म आधारित कामकाज के जारी आंकड़ो के अनुसार देश में कुल मुस्लिम आबादी का 33 फीसदी हिस्सा की कामकाज करता है। जबकि देश का राष्ट्रीय औषत 40 प्रतिशत है। जैन और सिख समुदाय 36-36 प्रतिशत काम करता है।
आंकड़ो के मुताबिक सर्वाधिक 43 फीसदी कामकाजी लोग बौद्घ धर्म के हैं, जबकि हिंदुओं की आबादी सबसे अधिक है। बौद्ध धर्म को अपनाने वालों में ज्यादातर दलित हैं।
हिंदुओं की बात करें तो 41 प्रतिशत हिंदू कामकाजी हैं। 48.20 करोड़ लोग रोजीरोटी के लिए काम कर रहे हैं। यह आंकड़ा कुल आबादी का 40 फीसदी हिस्सा है।