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मोदी के लिए गले की फांस बना उनका ये वादा

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पूर्व सैन्य अधिकारियों और जवानों को वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) का बढ़चढ़ कर किया गया वादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गले की फांस बनती जा रही है।
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एक तरफ आंदोलन तेज हो रहा है तो दूसरी तरफ आंदोलनकारियों ने बुधवार को तीन ताजा शर्तों को ठुकराकर सरकार को मुसीबत में डाल दिया है।

आंदोलनकारियों के नेतृत्व और सरकार के बीच लगातार चल रही बैकचैनल बातचीत के अबतक के परिणाम से 28 अगस्त को इसकी घोषणा की संभावना धुमिल पड़ती जा रही है।

सरकारी खजाने पर बढ़ेगा बोझ

आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार की यह शर्तें पैसे काटने का हथकंडा है। जबकि सरकार की मजबूरी है कि इन शर्तों को लागू करने से सरकारी खजाने पर हजारों करोड़ का अतिरिक्त बोझ पडेगा।

उधर आंदोलनकारियों ने एलान कर दिया है कि अगर सरकार अपने अड़ियल रवैये से पीछे नहीं हटती तो कोई भी पूर्व सैनिक 28 अगस्त को मनाए जा रहे 1965 भारत-पाक युद्ध की वर्षगांठ समारोह में शामिल नहीं होंगे।

सरकारी सूत्र आशंका जता रहे हैं कि बड़े पैमाने पर आयोजित इस समारोह में पूर्व सैनिकों की अनुपस्थिति से सरकार की बड़ी किरकिरी होगी। गौरतलब है कि सरकार 28 अगस्त को ही ओआरओपी की औपचारिक घोषणा करना चाहती है।
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मोदी से मिलने का वक्त मांगा

इंडियन एक्स-सर्विसमेन मूवमेंट के चेयरमैन मेजर जनरल सतवीर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का वक्त मांगा गया है। लेकिन अबतक उधर से कोई जवाब नहीं आया है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार अपने शर्त पर अड़ी हुई है कि पेंशन का कट ऑफ साल 2011 हो जबकि आंदोनलकारी 2015 को आधार बनाने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा सरकार ने पेंशन में तीन फीसदी सालाना बढ़ोत्तरी के मांग को नहीं मान रही है।

साथ ही सरकार कह रही है कि पेंशन का भुगतान अप्रैल 2014 से किया जाएगा। जबकि आंदोलनकारी 2015 से पेमेंट की मांग पर अड़े हैं। बुधवार की बातचीत के बाद दोनों पक्ष फिलहाल पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

मामले की नजाकत को देखते हुए सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह ने मंगलवार देर शाम आंदोलनकारियों के मुलाकात कर बीच का रास्ता निकालने की नाकाम कोशिश की।
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