प्रधानमंत्री का गोद लिया गांव जयापुर इतना बदला कि बच्चों को भी भाने लगा। साक्षी, पलक, मोहित, सावन, निखिल.. ये है जयापुर की किड्स ब्रिगेड। कोई नर्सरी का छात्र है तो कई कक्षा चार का, मगर सबकी आपस में गहरी दोस्ती है। दोस्ती की वजह है गांव में लगा नया झूला।
इनमें से कोई भी अबकी गर्मी की छुट्टियों में अपने नाना या मामा के यहां नहीं जाना चाहता। वजह पूछने पर कहते हैं, वहां न तो ऐसा झूला मिलेगा और न ऐसी चहल-पहल। ...और अब तो मेरा गांव देखने मौसी के बच्चे खुद ही आ गए।
गांव अगर बदल जाएं तो उन्हें कोई नहीं छोड़ना चाहेगा। कम से कम बच्चों का ये मामला तो यही कहता है। गांव में आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर दो झूले और एक रैंप लगाया गया है। जब से यह झूला लगा है, बच्चों की तो मानो चांदी हो गई है। जब भी मौका मिलता है घर से भागकर सभी यहां पहुंच जाते हैं। झूले दो हैं और झूलने वाले ढेरों, सो यहां नंबर लगता है।
मोहित, सावन और पायल किड्स ब्रिगेड के सबसे जूनियर सदस्य हैं। कक्षा तीन में पढ़ने वाले निखिल टीम लीडर हैं। गर्मी की छुट्टियों के बारे में पूछने पर कहते हैं, राजातालाब में मामा का घर है। हर साल स्कूल बंद हो जाने के बाद अम्मा मुझे मामा के यहां भेज देती थीं मगर अबकी मैं नहीं जाऊंगा। क्योंकि अब झूला और ‘फिसलने वाला’ यहीं लग गया है।