पाकिस्तान में एक और भारतीय कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है। सूत्रों के अनुसार जाकिर मुमताज नाम के कैदी को 8 जून को लाहौर स्थित जिन्ना अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
उस समय जाकिर के पेट में दर्द होने की बात कही गई थी। आधिकारिक सूत्रों ने बृहस्पतिवार की देर शाम जाकिर के संदिग्ध हार्ट अटैक से मौत होने की जानकारी दी। जाकिर अमृतसर का रहने वाला है।
यह पिछले कुछ महीनों में कोट लखपत जेल में बंद तीसरे भारतीय कैदी की मौत है। जाकिर की मौत हुई है या हत्या की गई है इसकी सही जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मिल सकेगी।
इससे पहले 15 जनवरी को कोट लखपत जेल में भारतीय कैदी चमेल सिंह की जेल के सुरक्षाकर्मियों द्वारा की गई पिटाई में मौत हो गई थी।
26 अप्रैल को सरबजीत सिंह की इसी जेल में कुछ कैदियों ने जमकर पिटाई की थी, जिसके बाद उन्हें जिन्ना अस्पताल में भर्ती कराया गया।
1 मई को अस्पताल के डॉक्टरों ने सरबजीत के ब्रेन डेड घोषित कर दिया था।
पाकिस्तान की जेलों, खासकर कोट लखपत जेल में भारतीय कैदियों पर हमलों के बावजूद वहां की सरकार उनकी पर्याप्त सुरक्षा के इंतजाम नहीं कर सकी है, इसी लिए इस तरह के हमले होते हैं।
भारतीय नागरिक जाकिर को कथित रूप से सीमा पार करने पर 3 अगस्त 2011 को गिरफ्तार किया गया था।
कोट लखपत जेल में कैदियों के हमले का शिकार हुए सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान सरकार द्वारा भारतीय कैदियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम न उठाए जाने के कारण ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारी हर बार भारतीय कैदियों पर हमले या उनकी मौत की खबर की पुष्टि रात 7-8 बजे के बीच जानबूझकर करते हैं जिससे भारतीय अधिकारी दूसरे दिन अगले दिन ही कोई कदम उठा सकें।
पाकिस्तान सरकार द्वारा भारतीय कैदियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम न उठाए जाने के कारण ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं।
पाकिस्तानी अधिकारी हर बार भारतीय कैदियों पर हमले या उनकी मौत की खबर की पुष्टि रात 7-8 बजे के बीच जानबूझकर करते हैं जिससे भारतीय अधिकारी दूसरे दिन अगले दिन ही कोई कदम उठा सकें।
- दलबीर कौर, सरबजीत की बहन