जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के चाचा डॉ. मुस्तफा कमाल के विवादास्पद बयान से सियासत गरमा गई है। किश्तवाड़ में नेकां कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए मुस्तफा कमाल ने कहा कि हमारा अपना मुल्क हमारा दुश्मन है, पाकिस्तान हमारा दुश्मन नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान के साथ युद्ध संधि पर आगे बढ़ने की केंद्र सरकार की मंशा पर भी सवालिया निशान लगाया था।
मुस्तफा कमाल यहीं नहीं रुके। उन्होंने इस दौरान रियासत में कांग्रेस के साथ किए गठबंधन को भी सियासी मजबूरी बताया। रविवार को आयोजित कार्यक्रम में मुस्तफा कमाल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद को मीठा और पीडीपी संरक्षक एवं पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद को कड़वा जहर करार दिया था।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के चाचा के इस बयान पर दिल्ली से लेकर रियासत की सियासत तक एक नया बवाल खड़ा हो गया है। नई दिल्ली में कांग्रेस के प्रवक्ता संदीप दीक्षित ने उनके इस बयान की कड़ी आलोचना की तो विपक्ष ने इस पर मुख्यमंत्री से सफाई देने की मांग की है।
हालांकि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने चाचा और नेशनल कांफ्रेंस के सीनियर नेता डॉ. मुस्तफा कमाल के केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद और पीडीपी के संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद विरोधी बयान से किनारा कर लिया है।
इस तमाम सियासी उठापटक के बीच मुख्यमंत्री उमर ने चाचा कमाल से बयान से खुद को अलग कर लिया है। यही नहीं, उन्होंने माइक्रो ब्लागिंग साइट ट्विटर पर इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया भी जाहिर कर दी। उमर ने ट्विट के जरिये स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी मुश्किलें बढ़ाने के लिए दूसरों की जरूरत नहीं, उनके अपने रिश्तेदार ही इसके लिए काफी है।
गौरतलब है कि डॉ. कमाल ने कांग्रेस और पीडीपी को दुश्मन करार देते हुए रियासत में कांग्रेस के साथ गठबंधन को सियासी मजबूरी और दोनों दुश्मनों को एक दूसरे से दूर रखने की रणनीति बताया था। कमाल ने केंद्र सरकार पर यह भी आरोप लगाया था कि वह पाकिस्तान से वार्ता करने के लिए पीछे हट रही है। उन्होंने आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट को काला कानून करार देने के साथ इसकी आड़ में सेना पर आतंकियों की जगह आम नागरिकों को परेशान करने का भी आरोप लगाया था।