अनुच्छेद 370 पर पीएमओ में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह के बयान से उठा तूफान बुधवार को और तेज हो गया। राजनीतिक रस्साकशी के बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी इस विवाद में कूद पड़ा।
संघ ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए कहा कि कश्मीर किसी की जागीर नहीं है। अनुच्छेद 370 रहे या न रहे लेकिन कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा।
तो उमर ने भी पलटवार किया कि संघ उनका माईबाप नहीं जो उन्हें इस मुद्दे पर बात करने न दे। उमर ने इस मुद्दे पर सरकार से सफाई देने की मांग भी की है। कांग्रेस ने भी भाजपा पर हमला बोला है।
बयानबाजी का दौर शुरू
पार्टी ने कहा है कि भाजपा चुनावी फायदे के लिए इस मुद्दे को उठा रही है और वोटों के लिए देश को बांटने की कोशिश कर रही है। इस बीच बुधवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली में संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की।
माना जा रहा है कि संघ ने भाजपा को इस मुद्दे पर बहस जारी रखने के लिए कहा है। हालांकि राजनाथ ने इस मसले पर जल्दबाजी नहीं करने की बात कही है।
जितेंद्र सिंह ने जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 की प्रासंगिकता पर मंगलवार को सवाल उठाते हुए इसे हटाने के लिए चर्चा शुरू करने की बात कही थी।
धारा 370 पर उमर का पलटवार
इस पर उमर ने कहा था कि या तो अनुच्छेद 370 रहेगा या फिर जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा ही नहीं रहेगा। बुधवार को संघ के प्रवक्ता राम माधव ने कहा, क्या उमर जम्मू-कश्मीर को अपनी पैतृक संपत्ति समझ रहे हैं।
अनुच्छेद 370 रहे या न रहे। मगर कश्मीर भारत का अटूट हिस्सा रहेगा। भाजपा नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने भी कहा कि उमर को भाजपा का चुनाव घोषणा पत्र पढ़ लेना चाहिए।
'चुनावी फायदे के लिए ऐसा कर रही भाजपा'
कांग्रेस ने कहा है कि भाजपा अच्छी तरह से जानती है कि अनुच्छेद 370 को वह संवैधानिक रूप से नहीं हटा सकती है। मगर भाजपा सरकार वोट की राजनीति के लिए ऐसी बात कह रही है।
भाजपा की नजर आगामी जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव पर है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि भाजपा का अनुच्छेद 370 पर रुख देश को बांटने वाला है। पार्टी इसका समर्थन नहीं करती।
'अनुच्छेद 370 को हटाना लगभग नामुमकिन'
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि भाजपा अनुच्छेद 370 को नहीं हटा सकती क्योंकि संविधान के मुताबिक ऐसा करने के लिए नए सिरे से राज्य की संविधान सभा का गठन करना होगा, जो कि लगभग नामुमकिन है।
राज्य की संविधान सभा ने 1957 में जम्मू कश्मीर के देश से विलय को मंजूर किया था। संविधान सभा के गठन के बाद ही अनुच्छेद 370 को लेकर कोई चर्चा हो सकती है। उमर ने भाजपा पर अनुच्छेद 370 को लेकर भ्रम पैदा करने का आरोप भी लगाया।