दुनिया में तेल के सबसे बड़े भंडारों में से एक सऊदी अरब ने आशंका जताई है कि तेल की कीमतें और गिर सकती हैं। सऊदी अरब के पेट्रोलियम एवं खनिज संसाधन मंत्री अली अल-नियामी का मानना है कि तेल की कीमतों में इससे भी ज्यादा यानी 20 डॉलर प्रति बैरल तक की गिरावट आ सकती हैं।
पिछले तीन सालों में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, मगर हाल के दिनों में तेल की कीमतें 50 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर पर जा पहुंची हैं। चार दशक पहले तेल की कीमतें दुनिया की अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति को अपने हिसाब से तय करती थीं। एक बार फिर वही कहानी दोहराई जा रही हैं।
इस गिरावट से जहां इसका उपभोग करने वाले देशों की चांदी है तो वहीं इसका निर्यात करने वाले देशों के लिए यह आर्थिक और राजनीतिक चुनौती का सबब बन चुका है। चूंकि ज्यादातर देश तेल के आयातक हैं, इसलिए कीमतें कम होने से इसका उन्हें फायदा ही मिल रहा है।
तेल की कीमतें कम होना ऐसे देशों के आर्थिक हालातों में सुधार लाने वाला साबित हो सकते हैं। हालांकि, तेल की कीमतों में इतनी भारी गिरावट से यूरोपीय संघ और जापान के सामने संकट पैदा हो गया है। जहां जापान गिरती कीमतों और मुद्रास्फीति में गिरावट से जूझ रहा है, वहीं जर्मनी समेत पूरे दक्षिणी यूरोप में आर्थिक सुस्ती के आसार नजर आ रहे हैं।