नाच-गाने या कॉमेडी लाइव शो में तड़का लगाने के लिए महिलाओं को अभद्रता से पेश करना महंगा पड़ सकता है। ऐसे मामले में दोषी पाए जाने पर भारी-भरकम जुर्माने के साथ कड़ी सजा तक हो सकती है।
महिलाओं की अश्लील प्रस्तुति पर लगाम कसने के लिए मानव संसाधन विकास से संबंधित संसद की स्थायी समिति ने सरकार से इसकी सिफारिश की है।
समिति ने कहा है कि नृत्य-संगीत या कॉमेडी जैसे दूसरे किसी कार्यक्रमों के लाइव परफारमेंस के बारे में इनडीसेंट रीप्रेजेन्टेशन ऑफ वुमन (प्रोअबिशन) एमेंडमेंट बिल में उल्लेख नहीं किया गया है।
जबकि लाइव परफारमेंस वाले गाने यू ट्यूब के माध्यम से सार्वजनिक हो जाते हैं। समिति का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों के एकत्रित होने वाले ऐसे समारोहों में महिलाओं के अश्लील ढंग से पेश किये जाने पर रोक लगना जरूरी है।
ऐसे कार्यक्रमों से युवाओं पर गलत प्रभाव पड़ता है। इसलिए संशोधित विधेयक में इसके खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान निश्चित रुप से होना चाहिए।
इससे पहले स्थायी समिति संशोधित बिल के दायरे में फिल्म और टीवी सीरियल को लाने की वकालत भी कर चुका है ताकि बॉक्स ऑफिस पर मोटी कमाई और टीआरपी बढ़ाने के लिए फिल्मों, टीवी सीरियलों में महिलाओं को परोसने की नई परंपरा पर रोक लगाई जा सके।
जबकि समिति की ओर से टीवी और रेडियो समेत ऑडियो-विजुअल माध्यम के जरिए सिनमेटोग्राफ कानून और केबल टीवी कानून की अनदेखी पर भी सवाल उठा चुका है।
समिति का मानना है कि प्रस्तावित संसोधित विधेयक के दायरे में फिल्म निर्माताओं, निर्देशक और ट्रेड बॉडी को लाने पर कोई स्पष्टता नहीं है। इसलिए संबंधित मुद्दे को सही तरीके से विधेयक में पेश करने की सिफारिश की गई है।