मोदी जब ओबामा से मिले तो एक सवाल सभी की जुबां पर था कि उन्होंने ओबामा को गिफ्ट में क्या दिया? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन से भी पत्रकारों ने ये और इसी तरह के तमाम सवाल पूछे थे।
खैर अब इस बात का पता चल गया है कि मोदी ने ओबामा को गिफ्ट में क्या दिया।
दोनों ने एक दूसरे को किताबें दी थीं जिनके बारे में मीडिया में खबरें भी आईं थीं लेकिन अब ये भी पता चल गया है कि किताबों के अलावा भी मोदी ने ओबामा को कुछ अपहार दिए थे।
तो क्या थे वो उपहार? मिशेल के लिए क्या ले गए थे मोदी? और व्हाइट हाउस की दीवारों पर क्या नई चीज है जो मोदी भारत से ले गए थे? इन सवालों के जवाब मिलेंगे आपको आगे की स्लाइडों में।
मोदी ने दो पेंटिंग दी थीं ओबामा को
पता चला है कि मोदी ने ओबामा को गिफ्ट में दो पेंटिंग भी दी थीं। ये पेंटिंग्स रोगन कारीगरी से बनी थीं और इन्हें बनाया था गुजरात के गफूर भाई ने।
अब्दुल गफूर का नाम कला की दुनिया में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर मोदी ने गफूर को सम्मानित भी किया था।
गफूर का परिवार पीढ़ीयों से इन पेंटिंग्स को बना रहा है। ये पेंटिंग्स फारसी प्रभाव वाली हैं और इन्हें बनाने में बेहद मेहनत लगती है।
गफूर कच्छ जिले के निरोना गांव में रहते हैं। उनका पूरा परिवार इसी काम में लगा हुआ है। किसी वक्त में ये रोगन कारीगरी पूरे कच्छ में की जाती थी लेकिन फिलहाल ये केवल निरोना गांव तक ही सिमट कर रह गई है।
बेहद प्राचीन और पेचीदा है रोगन कारीगरी
एक वक्त था जब कच्छ की महिलाएं रोगन कारीगरी की बनीं साड़ियां और ओढनी पहना करती थीं लेकिन अब आम तौर पर खत्री परिवार पेंटिंग्स ही बनाता है। अब्दुल गफूर को अटल बिहारी वाजपेई द्वारा नेश्नल टैक्सटाइल आर्ट अवार्ड भी मिल चुका है।
विदेश कच्छ आते हैं घूमने के लिए और खत्री परिवार द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स को देख कर मंत्रमुग्ध रह जाते हैं। माना जाता है कि यह कला ईरान से भारत आई थी लेकिन इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिलता है।
करीब आठ पीढियों से गफूर का परिवार इस काम में लगा है। आठवीं पीढी की नुमाईंदगी करने वाले साहिल भी अब इस काम से जुड़ गए हैं। रोगन कारीगरी को बड़ा फायदा पहुंचाया है परिवार के एक सदस्य सुमेर ने।
सुमेर को अंग्रेजी आती है और इसी की बदौलत वह कई प्लेटफॉर्म पर रोगन कारीगरी से बनी चीजें बेच पाते हैं, विदेशी ग्राहकों से बात कर पाते हैं। बेहद मांग पर अब खत्री परिवार मोबाइल कवर और महिलाओ के लिए पर्स भी बनाने लगा है।
अमर उजाला से हुई खास बातचीत
अमर उजाला संवाददाता वरुण कुमार से हुई खास बातचीत में अब्दुल गफूर ने बताया कि पीएम मोदी ने पहले से कोई खास ऑर्डर नहीं दिया था। जो पेंटिंग बनी रखीं थीं उन्हीं में से दो पेंटिंग अमेरिका ले जाने के लिए चुनी गईं।
उन्होंने बताया कि जो पेंटिंग अब व्हाइट हाउस की दीवारों पर सजी हैं उनका आकार दो फीट बाई तीन फीट है। ये बारीक रोगन कारीगरी वाली पेंटिंग्स हैं।
गफूर ने बताया कि,"मोदी को कला की बहुत अच्छी समझ हैं और इस प्राचीन कला की बारीकियों को भी वो जानते हैं। उन्होंने इस रोगन कारीगरी को बचाने और सहेजने के लिए जो मदद की हम उसके आभारी हैं।"
अब्दुल गफूर ने कहा कि,"हमारी कला व्हाइट हाउस तक पहुंची इससे बड़ी भला क्या बात होगी हमारे लिए। हमें उम्मीद है कि अब कमारे काम को पहले से अधिक पहचान मिलेगी।"
मिशेल के लिए पश्मीना शॉल भी ले गए थे मोदी
खबर के मुताबिक मोदी, मिशेल ओबामा के लिए भी एक तोहफा ले गए थे। ये तोहफा एक पश्मीना शॉल थी जो मिशेल को बेहद पसंद आई।
जानकारों को पता है कि पश्मीना जम्मू-कश्मीर की नायाब कारीगरी का नमूना है और विदेशी इसे काफी पसंद करते हैं।
दरअसल भारत के पहाड़ी इलाकों में चींगू नाम की एक बकरी पाई जाती है जिस पर से उतरने वाली पश्मीना ऊन से पश्मीना शॉल तैयार होती है।
एक बकरी पर से करीब 100 ग्राम पश्मीना उतरती है और एक शॉल बनाने में करीब 150 ग्राम पश्मीना इस्तेमाल की जाती है।
कश्मीर के कुछ इलाकों में चांग थांगी नाम की बकरी मिलती है इस पर से भी पश्मीना उतरता है। एक अनुमान के मुताबिक इनकी संख्या भारत में केवल 250 के आस पास ही है।