केंद्र की नई सरकार के सामने जल्द ही ऐसा प्रस्ताव रखा जा सकता है, जिस पर फैसला लेना आसान नहीं होगा।
यूपीए सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले साल भर में 12 सब्सिडीयुक्त सिलेंडरों को तोहफा दिया था, लेकिन ऐसी आशंका है कि नरेंद्र मोदी की सरकार के सामने सब्सिडीयुक्त सिलेंडरों को कम करने को प्रस्ताव रखा जा सकता है।
वित्त और पेट्रोलियम मंत्रालय नरेंद्र मोदी की कैबिनेट के सामने एक नोट रखने जा रहा है, जिसमें सब्सिडीयुक्त सिलेंडरों की संख्या में कटौती करने का सुझाव दिया गया है।
सिलेंडर घटाने के लिए कमेटी ने गढ़े नए तर्क
वित्त और पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक साझा नोट तैयार किया है, जिसे जल्द ही नई सरकार की कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। नोट में सुझाव दिया गया है कि सब्सिडी युक्त सिलेंडरों की संख्या 12 से 9 कर दी जाए।
ये सुझाव आईआईटी खड़गपुर के निदेशक संजय ढांडे के नेतृत्व में बनी कमेटी की सिफारिशों के आधार पर दिया है। कमेटी ने कहा है कि गरीबी रेखा के नीचे औसतन एक परिवार साल भर में सात से भी कम सिलेंडर इस्तेमाल करता है।
सब्सिडीयुक्त सिलेंडरों की संख्या 6 से बढ़ाकर सितंबर, 2013 में नौ और जनवरी, 2014 में 12 करने से आम आदमी के बजाय कॉमर्शियल यूजर्स का अधिक भला हो रहा है।
मोदी सरकार को करना है अंतिम फैसला
कमेटी का मानना है कि आम आदमी को 12 सिलेंडरों की जरूरत भी नहीं पड़ती, बचे हुए सिलेडर कॉमर्शियल यूजर्स इस्तेमाल करते हैं। यूपीए सरकार ने राजनीतिक दबाव में सब्सिडीयुक्त सिलेंडरों की संख्या बढ़ा दी, जिससे राजस्व घाटा बढ़ा है।
तेल कंपनियों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सब्सिडीयुक्त सिलेडरों की संख्या पर फैसला लेने की पूरी जिम्मेदारी मोदी सरकार पर है। माना जा रहा है कि कमेटी के सिफारिशों मोदी सरकार कमेटी की सिफारिशों पर विचार कर सकती है और यूपीए सरकार के फैसले को पलट सकती है।
जिसका सीधा मतलब यह होगा कि सब्सिडीयुक्त सिलेंडरों की संख्या फिर कम कर दी जाएगी।