भारत और जापान ने कई तकनीकी और कानूनी मुद्दों को सुलझाते हुए असैन्य परमाणु करार के समझौते पर दस्तख्त कर दिए। परमाणु मामलों पर जापान की संवेदनशीलता के मद्देनजर इस समझौते को भारत और जापान के बीच तेजी से गहरे होते सामरिक रिश्तों के तौर पर देखा जा रहा है। इसके साथ ही पीएम मोदी की प्रिय बुलेट ट्रेन परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए भी जापान ने हामी भर दी। दोनों देशों ने इन दोनों अहम समझौतों के अलावा रक्षा, पर्यटन, मैन्यूफैक्चरिंग और इन्फ्रास्ट्र्क्चर सेक्टर में सहयोग बढ़ाने का भी करार किया।
जापान के साथ असैन्य परमाणु करार इसलिए बेहद मायने रखता है कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल से ही दोनों देशों के बीच इसको लेकर बातचीत चल रही थी। पिछले साल पीएम मोदी के जापान दौरे के वक्त भी इस करार के होने की चर्चा थी।
मगर जापान में परमाणु करार को लेकर कडे़ अंदरूनी कानून के कारण इस समझौते में लंबा वक्त लगा है। भारत दौरे पर आए जापान के पीएम शिंजो अबे हैदराबाद हाउस में शनिवार को प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद पीएम मोदी के साथ मिलकर इस ऐतिहासिक फैसले को अंजाम दिया।
असैन्य परमाणु करार के अलावा जापान ने भारत में बुलेट ट्रेन के सपने को साकार करने के लिए भी बड़ा कदम बढ़ाया है। उसने मुंबई-अहमदाबाद के बीच 98,000 करोड़ रुपये की लागत से शुरू होने वाली बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए 81 प्रतिशत धन मुहैया कराने का एलान किया है।
2024 तक चलेगी बुलेट ट्रेन
जापान ने देश की पहली बुलेट ट्रेन के लिए करीब 90 हजार करोड़ रुपये की फंडिंग का ऑफर दिया है। 503 किलोमीटर लंबे इस रूट पर 300 किमी. की रफ्तार से बुलेट ट्रेन दौड़ाने की योजना है। वर्ष 2024 तक बुलेट ट्रेन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
भारत ने भी जापानी नागरिकों के लिए एक मार्च 2016 से आगमन पर वीजा सुविधा का ऐलान किया है। आतंकवाद के खिलाफ भी जापान ने भारत की जीरो टॉलरेंस की नीति का पूरा समर्थन किया है।
मोदी और अबे के बीच संपन्न शिखर वार्ता के बाद दोनों ही देशों ने एक-दूसरे का साथ देने की अपनी प्रतिबद्धता जताई। पीएम मोदी ने अबे को अपना एक निजी मित्र करार देते हुए उन्हें भारत-जापान भागीदारी का बड़ा समर्थक बताया।
दोनों नेताओं के बीच संपन्न शिखर वार्ता में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विस्तार सहित परस्पर रूप से महत्वपूर्ण कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इस दौरान अबे ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मुलाकात की।
पीएम मोदी ने कहा कि हमने असैन्य परमाणु ऊर्जा सहयोग पर हस्ताक्षर किए जो वाणिज्य एवं स्वच्छ ऊर्जा के लिए एक समझौते से कहीं ज्यादा है। यह एक शांतिपूर्ण तथा सुरक्षित दुनिया के लक्ष्य में रणनीतिक भागीदारी और परस्पर विश्वास के नए स्तर का एक शानदार प्रतीक है। तो जापानी पीएम ने साझा बयान में अपने संबोधन की शुरुआत नमस्कार से करते हुए देशवासियों का दिल जीतने की कोशिश की।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत के आर्थिक सपनों को सच करने में जापान से ज्यादा कोई मित्र मायने नहीं रखेगा। तो अबे ने भी भारत के बुनियादी और आर्थिक विकास में एक साथी बनकर साथ खडे़ रहने का भरोसा दिया है।
पांच साल में 35 अरब डॉलर का निवेश
जापान भारत में बुलेट ट्रेन समेत कई इन्फ्रास्ट्र्क्चर परियोजनाओं में अरबों रुपये का निवेश करेगा। अगले पांच साल के दौरान जापान यहां 35 अरब डॉलर का निवेश करेगा जो बहुत बड़ी राशि मानी जा रही है। मोदी ने कहा कि एक साल पहले लोगों को यह राशि चौंकाने वाली लगी थी। लेकिन थोड़े वक्त में इस निवेश की जो बुनियाद दिखी है उससे लगता है कि जल्द ही यह सच्चाई में बदल जाएगी।
मोदी की नीतियां बुलेट ट्रेन जैसी
जापान के प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी की नई आर्थिक नीतियों को जमकर तारीफ की और कहा कि ये नीतियां जापान की शिंकासेन हाई स्पीड ट्रेन की तरह हैं जो सुरक्षित और भरोसेमंद भी हैं। भारत-चीन बिजनेस लीडर्स फोरम में अबे ने कहा कि ये नीतियां बुलेट ट्रेन की गति से लागू हो रही हैं।
वाराणसी को दोहरी खुशी
वाराणसी को शनिवार को दो खुशियां एक साथ नसीब हुईं। एक ओर यूनेस्कोे ने वाराणसी और जयपुर को क्रिएटिव सिटी नेटवर्क में डाल दिया वहीं शिंजो अबे ने वाराणसी में कन्वेंशन सेंटर बनाने का फैसला किया। इस पर पीएम मोदी ने गदगद होकर इसे ट्वीट पर साझा किया।
जापान कार आयात करेगा
मोदी ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि पहली बार जापान भारत से कारें आयात करेगा। जापानी कंपनी मारुति सुजुकी यहां भारत में कारों का निर्माण करेगी और जापान को इनका निर्यात करेगी। अस्सी के दशक भारत में सुजुकी ने ही छोटी कार के निर्माण की नींव रखी थी।
अबे ने की गंगा आरती
भारत और जापान के बीच शिखर वार्ता खत्म होते ही पीएम मोदी शिंजो अबे को सीधे अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी ले गए और वहां उन्होंने उनके साथ भव्य गंगा आरती में हिस्सा लिया। वाराणसी में दशाश्वमेध घाट पर उन्होंने पारंपरिक भारतीय विधान के साथ आरती की और चंदन तिलक लगवाया। इस दौरान वाराणसी में भारी सुरक्षा व्यवस्था थी।