आम आदमी पार्टी (आप) ने विदेशों से धन लेने संबंधी आरोप को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के समक्ष पेश जवाब में पार्टी ने दावा किया कि ‘आप’ ही एकमात्र ऐसी पार्टी है, जिसने फंड लेने में पारदर्शी तरीका अपनाया है और पूरा रिकार्ड वेबसाइट पर सार्वजनिक किया है।
न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराज योग और न्यायमूर्ति जयंतनाथ की खंडपीठ के समक्ष शनिवार को ‘आप’ ने कहा कि शपथपत्र सहित जवाब दाखिल करने तक पार्टी को 30.50 करोड़ रुपये का फंड मिला है, जिसमें से 8.50 करोड़ रुपये अनिवासी भारतीयों से आया है।
अन्ना हजारे आंदोलन व किसी भी अन्य संगठन के नाम से पैसा नहीं लिया गया। फंड मात्र उन्ही भारतीय नागरिकों से लिया जाता है जो अपनी अर्जित आय से देते हैं। एनआरआई से भी उन्हीं के फंड स्वीकार किए जाते हैं, जो अपने वैध पासपोर्ट का नंबर देते हैं।
बिना पहचान वाले चेक व ड्राफ्ट वापस कर दिए जाते हैं और हर फंड देने वाले को रसीद दी जाती है। दान संबंधी सभी वित्तीय रिकार्ड, दान के स्रोत उनकी बेवसाइट पर सार्वजनिक किया है।
पार्टी ने कांग्रेस और भाजपा के खातों की ही जांच करवाने की मांग करते हुए कहा कि उक्त दोनों पार्टियों ने अज्ञात स्रोत से हजारों करोड़ रुपये का दान लिया है, लेकिन कोई हिसाब नहीं है। खंडपीठ ‘आप’ पर विदेशी फंड लेने का आरोप लगाने संबंधी दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिका में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया, प्रशांत भूषण और ‘आप’ एवं अन्य के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की गई है।
‘आप’ ने अपने जवाब में कहा कि वर्ष 2012 में गठित नई पार्टी है और सभी मुख्यधारा वाली अन्य पार्टियों से सबसे छोटी है। उसके पास सबसे कम फंड है। इसके बावजूद उसने पारदर्शी प्रणाली अपनाई है। उसने केंद्र सरकार को अपने बैंक खातों की पूरी जानकारी दी है।