चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में करारी हार मिलने के बाद पर्दे के पीछे से नरेंद्र मोदी से लड़ने की रणनीति को अब कांग्रेस ने छोड़ने का फैसला कर लिया है।
सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार तय करने की बात कहने के साथ ही तय हो गया है कि वह अपने बेटे राहुल गांधी का भविष्य ही तय करेंगी।
राहुल को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने को लेकर कांग्रेस में जबरदस्त मांग है। मगर विधानसभा चुनाव में फ्लॉप होने के बाद से 2014 का रास्ता कांग्रेस के लिए काफी मुश्किल दिख रहा है।
उम्मीदवारी को लेकर पार्टी के पास ज्यादा विकल्प नहीं है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को तीसरी बार उम्मीदवार के तौर पर खड़ा करना इतना आसान नहीं है।
यह बात आम हो गई है कि लोगों ने मनमोहन सरकार के खिलाफ गुस्से के चलते ही पार्टी को चार राज्यों में भाजपा के पीछे खड़ा कर दिया। वहीं खुद को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित करना सोनिया के लिए संभव नहीं लगता है।
विदेशी मूल मुद्दा विवाद के चलते 2004 में जीत दर्ज करने के बाद भी उन्होंने प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने से इनकार कर दिया था। ऐसे में सोनिया के सामने राहुल ही एकमात्र विकल्प बचे हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अब पार्टी आमने सामने की लड़ाई में विश्वास कर रही है।