मुस्लिमों की बढ़ती आबादी को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देश में जनसंख्या नीति की समीक्षा की मांग की है। संघ ने सरकार से गंभीर जनसंख्या असंतुलन और विभिन्न धर्मों के बीच असमान बाल दर की समस्या को दूर करने को भी कहा है।
जनसंख्या असंतुलन पर चिंता जताते हुए संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी मंडल ने शनिवार को एक प्रस्ताव पास किया है। प्रस्ताव में केंद्र से अनुरोध किया गया है कि वह देश में संसाधनों की उपलब्धता, भविष्य की जरूरतों और जनसंख्या असंतुलन की समस्या को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय जनसंख्या नीति को फिर से तैयार करे।
जनगणना 2011 के मुताबिक, 2001 और 2011 के दौरान मुस्लिमों की जनसंख्या में 0.8 फीसदी की वृद्धि हुई और इस समुदाय की आबादी 17.22 करोड़ पहुंच गई जबकि इसी अवधि के दौरान हिंदुओं की जनसंख्या बढ़ोतरी की दर में गिरावट दर्ज की गई। संघ के प्रस्ताव के हवाले से संगठन के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने बताया कि दुनिया भारत दुनिया के उन पहले देशों में से एक है जिसने 1952 की शुरुआत में ही कहा था कि वह जनसंख्या नियोजन के उपाय करेगा लेकिन वर्ष 2000 में आकर व्यापक जनसंख्या नीति तैयार की जा सकी और जनसंख्या आयोग का गठन हुआ।
मुस्लिम देश हित में अपनाएं परिवार नियोजन
उन्होंने कहा कि जनसंख्या नीति का उद्देश्य 2045 तक स्थिर वृद्धि दर लेकिन
स्वस्थ जनसंख्या का है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों में एक समान नीति लागू
की जानी चाहिए। प्रस्ताव में सीमा पार से हो रही घुसपैठ पर पूरी तरह से
रोक लगाने, नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर तैयार करने और घुसपैठियों को
नागरिकता हासिल करने और जमीन की खरीद से रोकने की बात भी कही गई है।
सह सरकार्यवाह ने कहा कि जनसंख्या में धार्मिक असंतुलन के चलते देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक पहचान पर गंभीर संकट आ सकता है और हजारिका कमेटी की रिपोर्ट इन तथ्यों की पुष्टि करती है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 की धार्मिक जनगणना के अनुसार, हिंदू, जैन, बौद्ध और सिखों की जनसंख्या घटी है, जबकि मुस्लिमों की बढ़ी है। मुस्लिम समुदाय को देश हित में परिवार नियोजन को अपनाना चाहिए।
घुसपैठ की वजह से जनसंख्या असंतुलन
गोपाल ने जनसंख्या असंतुलन के लिए घुसपैठ को एक बड़ी वजह बताया।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में पड़ोसी मुल्कों से होने वाली घुसपैठ के चलते गैर हिंदुओं खासकर मुस्लिमों की आबादी बढ़ी है। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों का खासतौर पर जिक्र करते हुए जनसंख्या में धार्मिक असंतुलन को गंभीर करार दिया।