करीब पचास दिन की जद्दोजहद और असमंजस की स्थिति के बाद रक्षा मंत्री एके एंटनी भारतीय नौसेना को नया प्रमुख देने में कामयाब रहे। एंटनी की हरी झंडी के बाद वाइस चीफ रविंदर कुमार धोवन ने बृहस्पतिवार को नौसेना प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल ली।
एडमिरल धोवन को उनके वरिष्ठ अधिकारी वाइस एडमिरल शेखर कुमार सिन्हा के बदले नौसेना की कमान दी गई है। यह आशंका जताई जा रही है कि पश्चिमी कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल सिन्हा अपने जूनियर के नीचे काम करने की बजाए पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
पश्चिमी कमान की पनडुब्बियों और युद्धपोतों में हुए हादसों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके जोशी ने 26 फरवरी को अचानक पद से इस्तीफा दे दिया था। सरकार ने भी आनन फानन में उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया था। लेकिन नए नौसेना प्रमुख का मामला ऐसा अटका कि एंटनी को फैसला लेने में करीब 50 दिन लग गए।
सूत्रों के मुताबिक जोशी के बाद शेखर सिन्हा के सबसे वरिष्ठ होने के बावजूद उन्हें प्रमुख नहीं बनाया गया क्योंकि हादसा उन्हीं के पश्चिमी कमान में हुआ था। सरकार उसी कमान के वाइस एडमिरल को प्रमुख के पद पर आसीन नहीं कर सकती थी जिसके चलते एडमिरल जोशी ने इस्तीफा दिया था।
वरिष्ठता के विवाद पर पूछे गए सवाल पर एडमिरल धोवन ने कहा कि नौसेना एक अनुशासित फोर्स है जहां सभी टीम की तरह काम करते हैं। लिहाजा इस मामले में कोई विवाद नहीं है। कमान संभालने के बाद मीडिया से बात करते हुए एडमिरल धोवन ने कहा कि दुर्घटना और हादसे रोकने के लिए सभी जरूरी उपाए किए जाएंगे।
एके एंटनी को नौसेना प्रमुख के लिए तीन वरिष्ठ अधिकारियों में से एक को चुनना था। इनमें जून 1974 में कमीशन लेने वाले वाइस एडमिरल सिन्हा सबसे वरिष्ठ थे। इस दौर में जनवरी 1975 में कमीशन लेने वाले धोवन और जुलाई 1975 बैच के पूर्वी कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल अनिल चोपड़ा शामिल थे। माना जा रहा है कि इस मामले में उच्च स्तर पर लॉबिंग भी की गई।
आखिरकार रक्षा मंत्री ने धोवन के नाम पर मुहर लगा दी। धवन अगले 25 महीने तक नौसेना प्रमुख के पद पर रहेंगे। दिलचस्प बात यह है कि अगर 60 साल के धवन को प्रमुख नहीं बनाया जाता तो वह अगले महीने की 31 तरीख को रिटायर हो जाते। लेकिन नियम के मुताबिक एडमिरल बनने के बाद उनके अवकाश प्राप्त करने की उम्र 62 साल हो गई है।