आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में दिल्ली कोर्ट की ओर से बरी किए जाने के बाद केरल के स्पीडस्टर एस श्रीसंत की वापसी के मामले ने राजनैतिक रंग ले लिया है।
क्रिकेट के मैदान में उनकी वापसी का बीड़ा कई माननीयों ने उठा लिया है। सांसदों के इस ग्रुप ने इस तेज गेंदबाज की वापसी के लिए बीसीसीआई से भी बात की है।
इस संबंध में बोर्ड के एक नहीं बल्कि कई पदाधिकारियों से श्रीसंत को राहत देने के लिए कहा गया है। हालांकि बोर्ड इस गेंदबाज को राहत देने के लिए किसी तरह की जल्दबाजी दिखाने के मूड में नहीं है।
क्षेत्रीयता का मामला बन गया!
श्रीसंत की क्रिकेट के मैदान में वापसी अब एक क्षेत्रीय मुद्दा बनता जा रहा है। केरल के विभिन्न पार्टियों के सांसद श्रीसंत के लिए आगे आ खड़े हुए हैं। उनके लिए इस गेंदबाज की वापसी पार्टीवाद से ऊपर उठकर क्षेत्रीयता का मामला बन गया है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री व वर्तमान में अलप्पुझा से कांग्रेस के सांसद केसी वेणुगोपाल ने अमर उजाला को बताया कि श्रीसंत को अब अदालत ने बरी कर दिया है। ऐसे में बीसीसीआई को भी उन पर लगे प्रतिबंध को हटा देना चाहिए।
उनकी अगुवाई में सांसदों ने बोर्ड के सचिव अनुराग ठाकुर के अलावा आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन राजीव शुक्ला और पूर्व बोर्ड अध्यक्ष शरद पवार से इस संबंध में बात की है।
अभियान को आगे जारी रखेंगे
बोर्ड ने उन्हें सिर्फ इतना ही कहा है कि वह श्रीसंत के केस को बोर्ड होने वाली वर्किंग कमेटी की बैठक में रखेंगे। वेणुगोपाल ने कहा कि वह श्रीसंत से प्रतिबंध हटाने के अभियान को आगे जारी रखेंगे।
गौरतलब है कि केरल के मुख्यमंत्री ओमेन चांडी ने भी श्रीसंत की क्रिकेट पिच पर वापसी के लिए प्रदेश सरकार की ओर से पूरी सहायता देने का खुला ऐलान पहले ही कर दिया है।
वहीं बोर्ड से जुड़े सूत्र बताते हैं कि श्रीसंत को लेकर उन पर काफी दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन बोर्ड ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाह रही है, जिससे उसे आगे मुश्किलों का सामना करना पड़े।
काफी सुबूत मौजूद
सूत्र यह भी बताते हैं कि बोर्ड के कुछ अधिकारियों ने इन सांसदों को यह भी
बताया है कि अदालत का फैसला कुछ भी आय हो, लेकिन श्रीसंत के खिलाफ उनके पास
काफी सुबूत मौजूद हैं।
बोर्ड इसके भी इंतजार में है कि इन खिलाड़ियों को
बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में तो अपील नहीं हो रही है।
लेकिन यह बात तय है कि श्रीसंत पर प्रतिबंध हटाने को लेकर बोर्ड पर
राजनैतिक दबाव जारी रहेगा।