प्रत्येक घरेलू गैस कनेक्शन पर सालाना महज छह सब्सिडाइज एलपीजी सिलेंडर
देने की सरकार की योजना के दायरे में अस्पताल, कॉलेज, धार्मिक संस्थान, जेल
और सेना की रसोई को भी शामिल कर लिया गया है। इस फैसले के बाद इन्हें
मिलने वाले बेहिसाब सिलेंडरों की संख्या सीमित हो गई है, लेकिन इन संस्थाओं
को छह से अधिक सिलेंडर का उपयोग करने पर बाजार मूल्य का भुगतान नहीं करना
पड़ेगा। तेल कंपनियां इन संस्थाओं को विशेष श्रेणी में रखकर नई दरें तय
करने वाली हैं।
देश में प्रत्येक महीने करीब 20 लाख घरेलू गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करने
वाली इन संस्थाओं को छह से अधिक सिलेंडर के लिए बाजार मूल्य से कम कीमत
चुकानी पड़ेगी। तेल कंपनियां विशेष श्रेणी के लिए गैर सब्सिडी प्राप्त कीमत
शुक्रवार को तय कर सकती हैं। माना जा रहा है कि यह कीमत आम जन के लिए तय
होने वाले बाजार मूल्य से आधी होगी।
इंडियन ऑयल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में कुल घरेलू एलपीजी
सिलेंडर का करीब दस फीसदी तक स्कूल, कॉलेज, अस्पतालों, सेना, जेल व घरेलू
संस्थाओं में उपयोग किया जाता है। जबकि उत्तर प्रदेश में ऐसी संस्थाएं करीब
5 फीसदी घरेलू गैस का इस्तेमाल करती हैं। अगर उन्हें बाजार मूल्य पर
सिलेंडर खरीद कर खाना तैयार करना पड़ा तो इसका असर भी आम आदमी की जेब पर
होगा। इसलिए विशेष श्रेणी के लिए अलग से नई दरें तय की जाएगी। माना जा रहा
है कि नई दरों में कर को कम किया जाएगा।
गौरतलब है कि रियायती दर पर रसोई गैस की संख्या सीमित करने के फैसले के बाद
अब तेल कंपनियों को एलपीजी बिक्री के लिए नया स्लैब तैयार करना पड़ रहा
है। इसमें घरेलू और गैर सब्सिडाइज घरेलू एलपीजी सिलेंडर मूल्य, व्यवसायिक
इस्तेमाल के लिए एलपीजी और विशेष श्रेणी में आने वाले संस्थानों के लिए गैर
सब्सिडाइज कीमत तय करनी पड़ रही है।