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देश की राजधानी में कठोर कानून का कोई खौफ नहीं

Sat, 20 Apr 2013 01:29 AM IST
प्रियंवदा सहाय/नई दिल्ली
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बीते 16 दिसंबर को युवती के साथ चलती बस में हुई दरिंदगी की घटना के बाद बने नए कानून का खौफ राजधानी दिल्ली में अब तक नहीं बन पाया है।
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यही वजह है कि दिल्ली में दरिंदगी की कहानी फिर से दोहराई गई है।

ऐसे मामलों में आरोपी को मौत की सजा तक देने का प्रावधान नए कानून में डालने के बावजूद हुई पांच साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना को प्रशासनिक असफलता के साथ पुलिस की संवेदनहीनता प्रमुख वजह मानी जा रही है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) पुलिस की मानसिकता को लेकर सकते में है। आयोग ने साफ कहा है कि केवल कानून बनाने से सरकार की जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती है।
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बल्कि तत्काल सुधार को लेकर भी गंभीरता दिखनी चाहिए। दूसरी ओर पुलिस की ओछी मानसिकता स्वीकार योग्य नहीं है।

आयोग इस बाबत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय समेत अन्य मंत्रालयों से बच्चों की सुरक्षा और उनसे सही तरीके से पेश आने के लिए पुलिस के कामकाज के ढंग में बदलाव की गुहार लगाएगा।

आयोग के सदस्य विनोद कुमार टिकू ने इस बारे में कहा कि इस दर्दनाक मामले में तत्काल कार्रवाई की जरूरत है। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने इस बाबत अपनी जांच शुरू कर दी है।

लेकिन दुष्कर्म के मामले में सरकार को कानून सख्त करने के साथ इसे सजगता से बहाल भी करना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता रंजना कुमारी ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था को बदलने की जरूरत है।

इसके लिए राजनीतिक सहयोग का होना जरूरी है। उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि लंबे समय से मुख्यमंत्री पद पर होने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उन्होंने कोई भी कड़ा कदम नहीं उठाया है।

उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं उस वक्त तक कम नहीं होगी जबिक दुष्कर्म के खिलाफ बनाए गए सख्त कानून के आधार पर कुछ लोगों को कड़ी सजा नहीं मिल जाती है। इसके लिए पुलिस की मानसिकता में बदलाव लाने की जरूरत भी है।

छुट्टी के दिन पीड़िता से नहीं मिलीं ममता शर्मा
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म की घटना की निंदा करते हुए भले ही दिल्ली पुलिस को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।
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लेकिन शुक्रवार को रामनवमी की छुट्टी होने के कारण अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया। छुट्टी के चलते उन्होंने पीड़ित बच्ची से मिलने की जहमत नहीं उठाई। वे किसी अन्य दिन पीड़िता से मिलने जाएंगी।

ममता शर्मा के इस बयान की निंदा फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट पर खूब हो रही है। उनसे संपर्क करने की कोशिशें भी नाकाम रहीं।
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