आम आदमी पार्टी के बढ़ते प्रभाव को लेकर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी चिंतित है। विधानसभा चुनाव में मिले समर्थन के बाद भाजपा को लोकसभा चुनाव में भी इस पार्टी के बढ़ते कदम का डर सता रहा है।
यही वजह है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भाजपा सरकार बनाने को लेकर बैकफुट पर रही। दरअसल यह भाजपा की रणनीति का भी हिस्सा है।
टीम केजरीवाल ने मारा पहला बाउंसर
भाजपा का सरकार नहीं बनाना कई सवाल छोड़ गया है। पार्टी सूत्रों की अगर मानें तो लोकसभा चुनाव के नाम पर प्रदेश भाजपा को कुर्बान कर दिया गया है। यह कदम भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
भाजपा यह चाहती है कि ‘आप’ की सरकार अगर दिल्ली में बनती है तो पार्टी के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल होंगे। चूंकि इस पार्टी के केजरीवाल वन मैन आर्मी हैं, लिहाजा वे लोकसभा चुनाव के समय दिल्ली में ही उलझे रहेंगे।
केजरीवाल का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र!
उन्हें लोकसभा चुनाव के दौरान अन्य राज्यों में चुनाव प्रचार करने का मौका नहीं मिलेगा। भाजपा को इस बात का भी डर सता रहा है कि दिल्ली में अरविंद वर्सेज मोदी के नाम पर कहीं चुनाव नहीं हो जाए। इन सब मुद्दे को लेकर संगठन स्तर पर सोमवार को एक बैठक भी की गई।
इतना ही नहीं पूर्ण बहुमत नहीं होने की स्थिति में अरविंद केजरीवाल को दिल्ली सरकार चलाने में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। कोई भी फैसला लेने के पहले उन्हें बहुमत खत्म होने का भी डर सताएगा।
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इस दौरान भाजपा लोकसभा चुनाव के समय यह भी आरोप लगाएगी कि भ्रष्टतम कांग्रेस पार्टी के साथ साठगांठ से सरकार चल रही है। ऐसे में एक तीर से दो निशाने भी साधे जा सकेंगे।
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर लोकसभा चुनाव के दौरान दिल्ली विधानसभा का चुनाव होता है तो भाजपा न केवल लोकसभा सीट प्राप्त करेगी बल्कि उसे विधानसभा में भी बहुमत मिलेगा। क्योंकि तब तक सरकार बेनकाब हो जाएगी और नरेन्द्र मोदी का जादू मतदाताओं पर चलेगा।