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केमरन ही नहीं, इंग्लैंड का समाज भी आदर दे रहा है

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ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड केमरन के इस बयान पर काफी चर्चा हो रही है कि एक दिन ऐसा भी आएगा कि ब्रिटेन का प्रधानमंत्री कोई ब्रिटिश मूल का नहीं, बल्कि एशियाई मूल का होगा। दूसरी ओर अमेरिका के उपचुनाव में भारत वंशियों की जीत भी चर्चा में है।
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इंग्लैंड के लेबर पार्टी के भारतवंशी सांसद वीरेंद्र शर्मा कहते हैं कि केमरन का बयान चौंकाता नहीं । इंदु शर्मा कथा सम्मान और एक सेमीनार में हिस्सा लेने के लिए भारत आए शर्मा कहते हैं कि केमरन ने जो कहा वह एशियाई लोगों के प्रति उनके विश्वास का प्रतीक है।

वीरेंद्र शर्मा का कहना है कि वहां का समाज भी एशियाई लोगों की खासकर भारत की सराहना कर रही है। लेकिन अभी संवैधानिक जगहों और कई महत्वपूर्ण जगहों पर भारतीयों को और जगह मिलनी चाहिए। अभी वहां की पार्लियामेंट में भारतीय मूल के आठ सांसद हैं। यह संख्या बढ़नी चाहिए।
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इंग्लैड में रह रहे भारतीयों की कई अपेक्षाएं

कुछ पहलुओं को सामने रखकर उन्होंने कहा कि अभी इंग्लैड में रह रहे भारतीयों की कई अपेक्षाएं हैं। देश के लीगल सिस्टम में भी वो अपना प्रभाव देखना चाहते हैं। वो फुटबाल टीम में भी भारतीय मूल के खिलाड़ी को देखना चाहते हैं।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इंग्लैंड में भारत में नई सरकार को एक परिवर्तन के तौर पर देखा जा रहा है। भारत के प्रधानमंत्री अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए दुनिया को तैयार कर रहे हैं। उन्हें यह ताकत और विश्वास, प्रवासी लोगों के कारण भी मिला है।

ब्रिटिश सांसद वीरेंद्र शर्मा ने कहा वह स्वयं में पंजाबी हैं, पचास साल पहले वह भारत से इंग्लैंड गए थे। आज अगर उनसे या उस दौर में इंग्लैड गए लोगों से भारत लौटने के लिए कहा जाए तो शायद न आ पाएं। लेकिन आज के युवा वहां जाकर भारत पर भी पलट कर नजर रख रहे हैं।

इंग्लैंड में परिस्थितियां बहुत बदल गई हैं

उन्हें जैसे ही अवसर दिखेंगे वह देश में लौट जाएंगे। जिस तरह प्रतिभाओं से भारत लौटने का आह्वान किया जा रहा है, उसे लेकर सोच बन रही है। लेकिन वह यह भी चाहते हैं कि वह व्यवस्थित तरीके से वापसी करें। किसी जल्दबाजी या भावुकता में नहीं।

उन्होंने आशा जताई कि अगर यह माहौल बनता है तो वह यहां बहुत बड़ा बदलाव लेकर आएगा। भारत के लिए यह वर्ग नए अनुभव के साथ खड़ा होगा।

वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि इंग्लैंड में परिस्थितियां बहुत बदल गई हैं। वहां का समाज, नेता और व्यवस्था यह खुलकर स्वीकार कर रही है कि उस देश की तरक्की में एशियाई देशों का बहुत योगदान है। खासकर वह भारत की सराहना करते है।

लेकिन अमेरिका की तुलना में बिट्रिश में अभी एशियाई मूल के लोगों को और राजनीति और दूसरे खास जगहों पर अवसर चाहिए।

महत्वपूर्ण जगहों पर भारतीयों को जगह मिलनी चाहिए

वह चाहने लगे हैं कि संवैधानिक जगहों और कई महत्वपूर्ण जगहों पर भारतीयों को और जगह मिलनी चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि अभी वहां की पार्लियामेंट में भारतीय मूल के आठ सांसद हैं।

यह संख्या बढ़नी चाहिए। केवल राजनीतिक पदों पर ही नहीं, समाज के दूसरे क्षेत्रों में भी भारतीयों को बेहतर जगह मिलनी चाहिए।

इसका सकारात्मक पक्ष यह है कि यह केवल भारतीय मूल के लोगों की आवाज नहीं हैं, बल्कि ब्रिटिश समाज अब ऐसा सोचने लगा है। बिट्रिश प्रधानमंत्री ने जो कहा, वह उस समाज की भी सोच बनती जा रही है।

इंग्लैंड में बाहरी लोगों में खासकर भारतीयों ने अपनी अलग जगह बना ली है।

भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसद ने कुछ पहलुओं को सामने रखकर कहा कि अभी इंग्लैड में रह रहे भारतीयों की कई अपेक्षाएं हैं। उनकी अपनी पहचान तो बन गई है, लेकिन उनका सपना यह भी है कि इंग्लैंड की फुटबाल टीम में कोई भारतीय मूल का खिलाड़ी भी हो।

फुटबाल के क्लबों में भी भारतीयों की धमक

वह यह भी चाहते हैं कि फुटबाल की क्लबों में भी भारतीयों की धमक हो। साथ ही देश के लीगल सिस्टम में भी वो अपना प्रभाव देखना चाहते हैं। आज भारतीय समाज इतना प्रभावशाली बन गया है कि ये अपेक्षाएं आसमानी नहीं लगती और जब केमरन एशियाई मूल के व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनने की बात कहते हैं तो इसे हंसी में नहीं उड़ाया जाता। बल्कि अमेरिका में भी इसी तरह भारतीयों के योगदान को सराहा जा रहा है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इंग्लैंड में भारत में नई सरकार को एक परिवर्तन के तौर पर देखा जा रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया से योग को अपनाने के लिए कहा है। भारत के प्रधानमंत्री को यह ताकत उन प्रवासी लोगों के कारण भी मिली है, जिन्होंने दूसरे मुल्कों पर जाकर अपनी पहचान कायम की है।

उन्होंने अपनी जो जगह बनाई है उसी के चलते प्रधानमंत्री दुनिया से आत्मविश्वास के साथ संवाद कर रहे हैं। उन्हें कोई हिचक नहीं है। इंग्लैड में रह रहे भारतीय मूल के लोग नई सरकार के आने पर कई बदलाव की अपेक्षा कर रहे हैं। इनमें सबसे अहम भारत में कानून और व्यवस्था का सवाल है। ज्यादातर लोगों को यहां अपने घर जमीन के कब्जों पर विवाद में उलझना पड़ता है। उन्हें समय पर और तरीके से पुलिस की मदद भी नहीं मिल पाती। उन्हें यहां आने पर कागजी कारर्वाइयों में बहुत उलझना पड़ता है।

पहले और आज के युवाओं में फर्क है

ब्रिटिश सांसद वीरेंद्र शर्मा ने कहा अब जो नई युवा पीढ़ी इंग्लैंड में रहने आई है, वह वहां के जीवन से काफी घुलमिल गई है। लेकिन वहां गए पचास साल पहले और आज के युवाओं में एक बड़ा फर्क है।

उन्होंने कहा कि वह स्वयं में पंजाबी हैं, पचास साल पहले वह भारत से इंग्लैंड गए थे। आज अगर उनसे या उस दौर में  इंग्लैड गए लोगों से भारत लौटने के लिए कहा जाए तो शायद न आ पाएं। लेकिन आज के युवा वहां जाकर भारत पर भी पलट कर नजर रख रहे हैं। उन्हें जैसे ही अवसर दिखेंगे वह देश में लौट जाएंगे। अच्छा है कि अब देश में ऐसे हालात दिखने लगे हैं। वरना पहले कोई इसकी चर्चा भी नहीं करता था कि वापस लौटने पर उन्हें इसी स्तर के जाब और सुविधाएं मिलेंगी।

उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाहर गई देश की प्रतिभाओं को जिस तरह भारत लौटने का आह्वान किया है, उसे लेकर सोच बन रही है। कोई अपनी जमीन, खेती, गांव से दूर नहीं रहना चाहता। एक सकारात्मक माहौल जैसा ही बनता दिखेगा, बाहर गया युवा देश में लौटने लगेगा। यहां के विकास में अपना सहयोग देगा।
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अपने देश वापस लौटना चाहते हैं लोग

वीरेंद्र शर्मा ने कहा, कि लोग वापस आना चाहते हैं। लेकिन वह यह भी चाहते हैं कि वह प्रोपर ( व्यवस्थित ) तरीके से वापसी करें। किसी जल्दबाजी या भावुकता में नहीं। बल्कि उन्हें अहसास कराया जाना जरूरी है कि उनका अपना देश उनकी काबिलियत की कद्र कर रहा है।

मेंबर आफ पार्लियामेंट वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि विदेश के प्रवास ने पंजाब के जीवन को बदला है। उन्होंने इससे इंकार किया कि विदेश की आकर्षक नौकरी ने पंजाब से खेती , कृषि और संस्कृति जैसे चीजों को नुकसान पहुंचाया है। विदेशों के आकर्षक प्रस्ताव से वह पंजाब में युवा खेती की ओर आकर्षिक नहीं होते।

उन्होंने कहा, पंजाब में आज भी खेती हो रही है। फर्क इतना है कि आज खेती की नहीं जाती, करवाई जाती है। पंजाबी युवा अपने उद्यम व्यवसाय में पूरी तरह जुड़ा हुआ है। उन्होंने आशा जताई कि अगर आऩे वाले समय में विदेशों में रह रहे प्रवासी लोगों की भारत वापसी का माहौल बनता है तो वह यहां बहुत बड़ा बदलाव लेकर आएगा। भारत के लिए नया अऩुभव के साथ खड़ा होगा।

वीरेंद्र शर्मा हाल में इंग्लैंड में पाकिस्तानी मूल बहुल इलाके से चुन कर आए एक सांसद के जरिए कश्मीर की मानवीय राजनीतिक  स्थिति पर कराए गोष्ठी में भारत का पक्ष मजबूती से रखने पर चर्चा में आए थे।
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