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गैर रियायती सिलेंडर हो सकते हैं और महंगे

Tue, 16 Oct 2012 12:54 AM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
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पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी ने साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़े गैर रियायती एलपीजी सिलेंडरों की कीमत आसमान छूने के बावजूद सरकार उसमें अपना हस्तक्षेप नहीं करेगी। ऐसे में अरब गल्फ एलपीजी की कीमत बढ़ने पर भारतीय उपभोक्ताओं को भविष्य में गैर रियायती सिलेंडर के इस्तेमाल के लिए हजार रुपये से ज्यादा का भुगतान भी करना पड़ सकता है। अरब गल्फ एलपीजी की कीमत भारतीय घरेलू गैस की कीमत से जुड़ी हुई है।
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उद्योग संगठन फिक्की के एक कार्यक्रम में रेड्डी ने सोमवार को यहां कहा कि सरकार गैर रियायती सिलेंडर की कीमतों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। हालांकि रेड्डी ने यह भी स्पष्ट किया कि रियायती सिलेंडर की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं होगा। सरकार छह घरेलू गैस सिलेंडरों पर सब्सिडी बरकरार रखेगी।  दरअसल गैर रियायती सिलेंडर की कीमत तेल कंपनियां खुद तय करती हैं। वैश्विक बाजार से जुड़े होने के कारण कीमतों की समीक्षा के लिए कंपनियों को केंद्र से अनुमति की जरूरत नहीं होती। जबकि इन पर होने वाले घाटे की भरपाई भी सरकार नहीं करती है।

मालूम हो कि अगस्त में अरब गल्फ एलपीजी का मूल्य 767.12 डॉलर प्रति टन था जिसे देखते हुए तेल कंपनियों ने सितंबर में गैर रियायती रसोई गैस की कीमत 756 रुपये प्रति सिलेंडर तय कर दी थी। जबकि पिछले माह अरब गल्फ एलपीजी की कीमत 970 डॉलर प्रति टन होने के बाद अक्तूबर में गैर रियायती एलपीजी का दाम 883 रुपये प्रति सिलेंडर तय किया गया है। ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमत पिछले साल मार्च के स्तर 1230 डॉलर प्रति टन पर चली जाए तो रसोई गैस की कीमत हजार रुपये से ज्यादा भी हो सकती है।
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