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नोएडा एक्सटेंशन पर फिर बढ़ी ‘टेंशन’

Mon, 07 Jan 2013 11:44 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
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नोएडा एक्सटेंशन को लेकर फिर से ‘टेंशन’ बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश सरकार को झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पतवाड़ी गांव अधिग्रहण मामले में आबादी की भूमि पर यथा स्थिति कायम रखने का आदेश दिया है। सर्वोच्च अदालत ने भू-स्वामियों के आग्रह पर यह आदेश जारी किया है। इस आदेश का असर गांव की जमीन पर चल रहे कई प्रोजेक्ट के निर्माण पर तो पड़ेगा ही, साथ ही नोएडा एक्सटेंशन की रिहायशी परियोजनाओं में निवेश करने वाले भी लोग भी प्रभावित होंगे। स्थिति जस की तस रहने से आगे के कामकाज पर अगले आदेश तक रोक लगी रहेगी। शीर्षस्थ अदालत इस मामले पर 25 फरवरी को अगली सुनवाई करेगी।
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सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में गत वर्ष फरवरी में नोटिस जारी कर राज्य सरकार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से जवाब तलब किया था। मगर प्रदेश सरकार की ओर से अब तक जवाब नहीं दाखिल किया गया, जिसके आधार पर भू-स्वामियों की ओर से इस मामले में रोक लगाने की मांग की गई। जस्टिस आरएम लोढ़ा व जस्टिस अनिल आर दवे की पीठ के समक्ष आवेदक सरजीत सहित 14 भू-स्वामियों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता एसआर सिंह ने दलील दी कि राज्य सरकार इस मामले में गंभीर नहीं है। यही वजह है कि उसकी ओर से कोई जवाब नहीं दाखिल किया गया।

उन्होंने तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने इस मामले में भूमि मालिकों को मुआवजा बढ़ाकर देने का आदेश दिया था। मगर प्रदेश सरकार और प्राधिकरण ने उस आदेश का पूरी तरह से पालन नहीं किया। मुआवजा दिया गया, लेकिन विकसित जमीन देने के मुद्दे को चुनौती दे दी गई। सिंह ने अदालत से सख्त रुख अपनाकर जल्द न्याय दिलाने की गुजारिश की और अधिग्रहित भूमि के मामले में रोक लगाने का आदेश जारी करने की मांग की। पीठ ने अधिवक्ता की दलीलों से सहमति जताते हुए यथा स्थिति का आदेश जारी किया।
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याद रहे कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 21 अक्टूबर, 2011 को भूमि मालिकों को मुआवजे की रकम को 64.70 प्रतिशत बढ़ाने का आदेश जारी किया था। साथ ही विकसित क्षेत्र में 10 प्रतिशत जमीन देने को भी कहा था। पतवाड़ी गांव के भू-स्वामियों की ओर से आबादी वाले क्षेत्र में किए गए अधिग्रहण के मसले पर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। इन भूमि मालिकों ने अदालत से आबादी की जमीन वापस दिए जाने की मांग की है।  पतवाड़ी के अलावा भी ग्रेटर नोएडा के तमाम गांवों में राज्य सरकार की ओर से किए गए अधिग्रहण का मामला सर्वोच्च अदालत में लंबित है। शीर्षस्थ अदालत की ओर से कई मामलों में राज्य सरकार की ओर से जवाब तलब किया जा चुका है। जबकि प्राधिकरण की ओर से भी हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।
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