यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और रियल इस्टेट कंपनी डीएलएफ के बीच कथित विवादित डील के मामले में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने किसी भी तरह की जांच कराए जाने से इंकार किया है। एक कार्यक्रम के दौरान चिदंबरम ने कहा कि वाड्रा और डीएलएफ के बीच हुए सौदे निजी कारोबारी सौदे हैं, इसलिए इनकी जांच नहीं कराई जा सकती।
चिदंबरम ने कहा कि इस सौदे में सरकारी स्तर पर किसी भी तरह के भ्रष्टाचार की कोई बात नहीं है, इसलिए सरकारी स्तर पर जांच कराने का सवाल ही नहीं उठता है। उन्होंने कहा कि देश की कोई भी निजी कंपनी अगर किसी व्यक्ति के साथ सौदा करती है और यह निजी निवेश होता है। इसमें सरकार जांच नहीं करा सकती।
गौरतलब है कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ के साथ सांठगांठ का आरोप लगाया है। केजरीवाल के मुताबिक डीएलएफ ने रॉबर्ट वाड्रा को बिना गारंटी और बिना ब्याज के लोन दिया। केजरीवाल ने मांग की थी कि इस मामले की जांच होनी चाहिए कि डीएलएफ ने वाड्रा को बिना गारंटी और ब्याजमुक्त लोन क्यों दिया।
रॉबर्ट वाड्रा ने केजरीवाल के आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज किया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने अपना राजनीतिक कैरियर लांच करने और सस्ती लोकप्रियता पाने के मकसद से ये आरोप लगाए हैं। वाड्रा ने यह भी कहा कि केजरीवाल और प्रशांत भूषण ने उनका वित्तीय लेखा-जोखा जानबूझकर गलत तरीके से मीडिया में पेश किया ताकि उन्हें व उनके परिवार को बदनाम किया जा सके।
केजरीवाल के आरोपों पर डीएलएफ ने कहा कि वाड्रा के साथ उसके सारे कारोबारी लेन-देन नैतिक, पारदर्शी और जायज हैं। कंपनी ने साफ कहा कि उसने वाड्रा को कोई असुरक्षित कर्ज नहीं दिया और न ही बदले में उसने किसी प्रकार के हित साधे। डीएलएफ के मुताबिक, जमीन खरीदने के बदले 65 करोड़ रुपये की राशि वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड को बतौर एडवांस दी गई, जो कारोबार जगत के चलन के अनुरूप है।